निदेशक प्रो. एसएन सिंह के खिलाफ भाजपा नेताओं व राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के पदाधिकारियों ने कई शिकायतें की हैं। इसमें पद का दुरुपयोग करने, भर्ती में मनमानी, संविदा कर्मियों की नियुक्ति में अनियमितता आदि के आरोप लगाए गए हैं।
आयुष कॉलेजों के दाखिलों में हेराफेरी में आयुर्वेद निदेशक प्रो. एसएन सिंह के निलंबित होने के बाद उनके खिलाफ शिकायतों की जांच में तेजी आ गई है। दूसरी तरफ निदेशालय से लेकर शासन तक में शिकायतें आ रही हैं।
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निदेशक प्रो. एसएन सिंह के खिलाफ भाजपा नेताओं व राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के पदाधिकारियों ने कई शिकायतें की हैं। इसमें पद का दुरुपयोग करने, भर्ती में मनमानी, संविदा कर्मियों की नियुक्ति में अनियमितता आदि के आरोप लगाए गए हैं। इसकी जांच खनन सचिव रोशन जैकब को सौंपी गई है। अब शासन की ओर से खनन सचिव को पत्र लिखकर 15 दिन में जांच आख्या मांगी गई है।
मूल तैनाती वाले कॉलेज से मांगी पत्रावलियां
निलंबित किए गए आयुर्वेद निदेशक, प्रो. उमाकांत न पांच अन्य कर्मचारियों के बारे में उनके तैनाती वाले स्थल से पत्रावलियां तलब की गई हैं। इसमें कार्यभार ग्रहण करने से लेकर कब पदोन्नति हुई और कब-कब किस पद पर रहे आदि के दस्तावेज जुटाए जा रहे हैं। विभागीय अफसरों का कहना है कि ये दस्तावेज एसटीएफ जांच के मद्देनजर जुटाए जा रहे हैं। जिससे जांच एजेंसी के मांगने पर उसे तत्काल उपलब्ध कराया जा सके।
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निदेशालय से शासन तक चक्कर काट रहे निलंबित छात्र
निलंबित किए गए विभिन्न कॉलेजों के छात्र निदेशालय से लेकर शासन तक चक्कर काट रहे हैं। छात्रों का कहना है कि उन्होेंने सही तरीके से दाखिला लिया है। इसके बावजूद उन्हें नोटिस देकर निलंबित कर दिया गया है। गोंडा के एक कॉलेज के प्रधानाचार्य ने रिपोर्ट भेजी है कि जिन दो छात्रों को नोटिस जारी किया गया, वे दाखिले के बाद से ही कॉलेज नहीं आए हैं। इसी तरह राजकीय नेशनल होम्योपैथिक कॉलेज में दाखिला लेने वाले जिस छात्र का नाम दिया गया है, उसने दाखिला स्थगित करा लिया था। उसकी जगह सेकंड काउंसिलिंग में दूसरे छात्र ने दाखिला लिया है। इस तरह 891 छात्रों की सूची में भी कई तरह के गड़बड़झाला सामने आ रहे हैं। फिलहाल विभागीय अफसरों का कहना है कि अब नए सिरे से जांच होगी, तभी स्थिति साफ होगी।