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केजीएमयू वेंटीलेटर खरीद की नए सिरे से होगी जांच

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केजीएमयू में वेंटिलेटर खरीद की नए सिरे से होगी जांच
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लखनऊ। केजीएमयू में वेंटिलेटर खरीद मामले की नए सिरे से जांच होगी। अगस्त 2015 में 40 वेंटिलेटर खरीदे गए थे। आरोप है कि केजीएमयू प्रशासन ने हर वेंटिलेटर को एसजीपीजीआई से करीब सात लाख रुपये महंगा खरीदा। जबकि इसके मुकाबले एसजीपीजीआई के वेंटिलेटर में कहीं अधिक स्पेसिफिकेशन हैं।
केजीएमयू में अगस्त 2015 में खरीदे गए 40 वेंटिलेटर के मामले की वर्ष 2017 में भी जांच की गई थी, लेकिन मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। अब एक निजी अस्पताल में कार्यरत डॉ. संतुष्ट कुमार ने नए सिरे से मुख्यमंत्री से शिकायत की है। इसमें आरोप लगाया है कि केजीएमयू में अगस्त 2015 में खरीदे गए वेंटिलेटरों के जरिए लाखों रुपये की बंदरबांट की गई है। करीब दो करोड़ 90 लाख की लागत से 40 वेंटिलेटर खरीदे गए। यही वेंटिलेटर एसजीपीजीआई ने भी खरीदे हैं। एसजीपीजीआई के मुकाबले केजीएमयू के वेंटिलेटर्स का स्पेसिफिकेशन कम है। अल्ट्रा नेबुलाइजर, स्ट्रेस इंडेक्स, ओपेन लंग टूल आदि नहीं है। ऐसे में केजीएमयू के वेंटिलेटर एसजीपीजीआई से सस्ते होने चाहिए थे। संस्थान में अपग्रेडेशन (स्थापना) भी मुफ्त हुई है। इसके बाद भी अधिक भुगतान किया गया। उन्होंने पूरे मामले की जांच कराने की मांग की है। इस पर विशेष सचिव उत्तर प्रदेश शासन ने प्रमुख सचिव चिकित्सा शिक्षा विभाग को पत्र भेजा है। पूरे मामले की जांच कराकर स्थिति से अवगत कराने को कहा है।
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नहीं मिला कोई पत्र
अभी तक शासन से इस तरह का कोई पत्र नहीं मिला है। पत्र मिलने पर मामले में जानकारी दी जाएगी। पहले इस प्रकरण की जांच हुई थी। पूरी जांच रिपोर्ट तो याद नहीं है, लेकिन वेंटिलेटर खरीद में गड़बड़ी नहीं मिली थी। संभवत: वेंटिलेटर के कुछ पार्ट्स अलग थे।
- राजेश कुमार राय, कुलसचिव, केजीएमयू
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