कोर्ट ने राजस्व निरीक्षक को बरी करते हुए महत्वपूर्ण टिप्पणियां कीं। कोर्ट ने कहा कि तत्कालीन जिलाधिकारी सूर्यपाल गंगवार ने अभियोजन स्वीकृति में स्वतंत्र मस्तिष्क का प्रयोग नहीं किया। उन्होंने अभियोजन के किसी दस्तावेज को भी नहीं देखा था। तत्कालीन जिलाधिकारी ने केवल जिला शासकीय अधिवक्ता के विधिक परामर्श पर स्वीकृति दी, जो विधिमान्य नहीं है। कोर्ट ने जिलाधिकारी के अभियोजन स्वीकृति आदेश को पूर्ण रूप से अवैध बताया। ऐसे अवैध आदेश पर प्रेषित अभियोजन कार्रवाई पूर्ण रूप से शून्य हो जाती है।
कोर्ट ने मामले के वादी दयाराम को अत्यंत संदिग्ध और अविश्वसनीय बताया। वादी बार-बार अपने बयान बदल रहा था। उसके बयान से यह साबित नहीं हुआ कि शशिकांत उपाध्याय ने रिश्वत मांगी थी। दयाराम ने 8 दिसंबर 2023 को उप्र सतर्कता अधिष्ठान के पुलिस अधीक्षक से शिकायत की थी। उसने आरोप लगाया कि शशिकांत ने 10 हजार रुपये रिश्वत लिए बिना मेड़बंदी से मना किया।