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तेज हुई खसरा ऑनलाइन करने की तैयारी, अब 21 की जगह 46 बिंदुओं की दर्ज होगी जानकारी

Thu, 09 May 2019 01:00 AM IST
Amulya Rastogi न्यूज डेस्क, अमर उजाला लखनऊ
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सांकेतिक तस्वीर
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राजस्व परिषद में खसरा ऑनलाइन करने की तैयारी तेज कर दी गई है। परिषद ने इसके लिए खसरे का नया प्रारूप डिजाइन किया है। इससे खाताधारकों के साथ राजस्व कर्मियों को भी सहूलियत होगी। नए प्रारूप में गैर आबादी प्रत्येक गाटे से जुड़ी पहले से अधिक सूचनाएं भी जुटाई जा सकेंगी।
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राजस्व परिषद ने ऑनलाइन खसरे की तैयारी में 46 बिंदुओं का प्रारूप तैयार किया है। मतलब इसमें पहले से अधिक सूचनाएं दर्ज की जा सकेंगी। इसमें पूर्व की सूचनाओं के साथ गाटे का यूनिक कोड, खतौनी खाता संख्या, गाटों में वृक्षों की संख्या व प्रजाति के साथ गैर कृषक उपयोग का प्रकार, उसका क्षेत्रफल, घोषित गैर कृषक क्षेत्रफल, गैर कृषक घोषित करने की वाद स्थिति, घोषित करने का आदेश भी दर्ज होगा। पट्टे से जुड़े गाटे का ब्योरा भी देना होगा। इसमें पट्टा प्रारंभ होने व खत्म होने की तिथि भी दर्ज की जाएगी।

प्रारूप में कृषि अवशिष्टों के निस्तारण के संबंध में भी बताना होगा यानी कि पराली जलाई गई या नहीं। दैवी आपदा का प्रकार, आपदा से प्रभावित क्षेत्रफल व नुकसान की रिपोर्ट भी दर्ज होगी। खास बात ये है कि ऑनलाइन ब्योरा दर्ज करने के बाद ये सूचनाएं ए-4 साइज पेपर पर निकलेंगी। इसे जारी करने और सहेज कर रखने में भी आसानी होगी।

राजस्व विभाग में खसरा अपडेट करने की वर्तमान में मैनुअल व्यवस्था है। इसके अंतर्गत राजस्व लेखपाल खसरे में प्रत्येक गाटे की भूमि के उपयोग की स्थिति दर्ज करता है। मसलन, उसमें खेती हो रही है तो क्या बोया गया है? उसमें फसलवार ब्योरे के साथ दो फसली भूमि का क्षेत्रफल भी दर्ज किया जाता है। 
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भूमि में पेड़, सिंचाई के साधन या गैर कृषि उपयोग की भी जानकारी दी जाती है। वर्तमान में 21 बिंदुओं में खेत की खरीफ, रबी व जायद सीजन में पड़ताल की जाती है। खसरे के एक पेज पर कई खाताधारकों का ब्योरा दर्ज किया जा सकता है। इसका पेपर काफी चौड़ा होने की वजह से इसे मोड़कर रखना पड़ता है जिससे इसके रखरखाव में मुश्किलें भी आती हैं।

खसरा ऑनलाइन करने की कार्यवाही तेजी से चल रही है। इसमें कई नए फीचर जोड़े गए हैं। इससे पड़ताल में अधिक स्पष्टता रहेगी और भूमि विवाद भी कम करने में मदद मिलेगी। राजस्व कर्मियों को इससे बड़ी सहूलियत होगी और काश्तकारों को बिना दौड़-धूप किए ऑनलाइन रिपोर्ट प्राप्त हो सकेगी। चुनाव आचार संहिता खत्म होने के बाद मुख्यमंत्री से सहमति लेकर खसरे को ऑनलाइन कर दिया जाएगा।
- प्रवीर कुमार, चेयरमैन, राजस्व परिषद
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