समाजवादी पार्टी में वैसे तो बाप-बेटे में दंगल की शुरुआत जून में ही हो गई थी, लेकिन इसमें ज्यादा तल्खी अक्तूबर में देखने को मिली। देखिए क्या-क्या हुआ 3 महीने में?
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घटनाक्रम
12 अक्तूबर, 2016 : सपा परिवार में चल रही अंदरूनी जंग फिर से तब सार्वजनिक तौर पर सामने आई जब सपा चिंतक राम मनोहर लोहिया की पुण्यतिथि के अवसर पर लखनऊ स्थित लोहिया पार्क में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव पहुंचे जरूर लेकिन सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव के आने से पहले ही वहां से निकल गए।
14 अक्तूबर : मुलायम सिंह ने कहा कि चुनाव में बहुमत मिला तो विधानमंडल दल मुख्यमंत्री का फैसला करेगा।
16 अक्तूबर : राम गोपाल यादव ने मुलायम सिंह को चिट्ठी लिखकर कहा कि पार्टी स्थापना के लिए लोग आपकी पूजा करते हैं। इसके पतन के लिए भी आपको ही दोषी ठहराएंगे।
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21 अक्तूबर : अखिलेश ने कहा कि सपा एक नंबर पर चल रही थी, इस घटनाक्रम से पार्टी का ग्राफ गिरा है। इससे सभी चिंतित हैं।
शिवपाल भावुक होते हुए बोले कि मुख्यमंत्री कहें तो मै अध्यक्ष पद छोड़ने को तैयार हूं। मेरे लिए पद से ज्यादा महत्वपूर्ण पार्टी है।
22 अक्तूबर : शिवपाल यादव ने विधानपरिषद सदस्य उदयवीर सिंह को पार्टी से निष्कासित किया।
शिवपाल यादव मंत्रिपरिषद से बर्खास्त
मुख्यमंत्री अखिलेश यादव व सपा के प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल यादव
- फोटो : amar ujala
23 अक्तूबर : अखिलेश ने राजस्व मंत्री व प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल यादव और उनके तीन करीबियों को मंत्रिपरिषद से बर्खास्त कर दिया।
उधर, मुलायम सिंह ने पार्टी के महासचिव और प्रवक्ता राम गोपाल यादव को सभी पदों से हटाने हुए छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया।
24 अक्तूबर : मुलायम सिंह ने अखिलेश और शिपवाल को गले मिलवाया, लेकिन दोनों मंच पर ही भिड़ गए।
25 अक्तूबर : मुलायम सिंह ने कहा कि अगले सीएम का चुनाव विधायक तय करेंगे, फिलहाल अखिलेश ही मुख्यमंत्री रहेंगे।
रामगोपाल ने मुलायम के जेल जाने से अमर सिंह द्वारा बचाए जाने के मुलायम सिंह के बयान पर कहा कि उन्होंने खोटे सिक्के के लिए असली सिक्के को बाहर कर दिया।
27 अक्तूबर : शिवपाल ने कहा कि मुझे किसी पद का लालच नहीं है। अगर मुख्यमंत्री बनना होता तो 2003 में ही बन जाता।
3 नवंबर : अखिलेश ने चुनावी अभियान का आगाज करते हुए मुलायम और शिवपाल की मौजूदगी में कहा कि लोगों ने साजिश की, षड्यंत्र किया, गुमराह किया, जिसके चलते हम डगमगाए जरूर हैं, लेकिन विश्वास है कि फिर से सरकार बनाएंगे।
5 नवंबर : सपा की रजत जयंती समारोह में भी शिवपाल सिंह व अखिलेश यादव के बीच तल्खियां कम नहीं हुई।
2 दिसंबर : अखिलेश ने कांग्रेस के साथ गठबंधन की खुलकर वकालत किया, कहा कि अगर दोनों पार्टियां अगला विधानसभा चुनाव मिलकर लड़ती हैं तो 300 से अधिक सीटों पर जीत हासिल की जा सकेगी।
7 दिसंबर : अखिलेश के एतराज को नजरअंदाज करते हुए मुलायम सिंह ने अमर सिंह को पार्टी के संसदीय बोर्ड में शामिल किया।
28 दिसंबर : मुलायम सिंह ने 325 विधानसभा उम्मीदवारों की सूची जारी कर दी, जिसमें शिवपाल सिंह समर्थकों को तरजीह मिली
29 दिसंबर : मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने पार्टी के फैसलों से आहत होकर अलग से अपने 235 प्रत्याशियों की सूची जारी की।
30 दिसंबर : मुलायम सिंह यादव ने मुख्यमंत्री अखिलेश यादव व रामगोपाल यादव को छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया।
31 दिसंबर : अखिलेश द्वारा बुलाई गई बैठक में 200 से ज्यादा विधायकों के पहुंचने से बैकफुट पर आए मुलायम सिंह ने अखिलेश और राम गोपाल की पार्टी से बर्खास्तगी को रद कर दिया।
1 जनवरी, 2017 : अखिलेश द्वारा बुलाए गए पार्टी की विशेष राष्ट्रीय अधिवेशन में मुलायम सिंह को हटा कर अखिलेश यादव पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष चुन लिए गए। अमर और शिवपाल बर्खास्त।
मुलायम सिंह ने अधिवेशन को असंवैधानिक करार दिया तथा रामगोपाल को पार्टी से छह साल के लिए बर्खास्त करने की पुष्टि की।
2 जनवरी : पार्टी के चुनाव चिन्ह साइकिल व पार्टी के नाम पर अपना दावा पेश करने के लिए मुलायम सिंह चुनाव आयोग पहुंचे।
3 जनवरी : अखिलेश और मुलायम सिंह के बीच तीन घंटे तक बातचीत हुई, पर सुलह की कोशिश बेनतीजा रहा।
5 जनवरी : चुनाव आयोग द्वारा हलफनामा मांगने के बाद अखिलेश धड़े के करीब 266 विधायकों (विधानसभा और विधान परिषद को मिलाकर) ने समर्थन का दावा किया।