यूपी बोर्ड कैबिनेट ने बोर्ड के कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति आयु 58 साल से बढ़ाकर 60 साल करने और राज्य कर्मचारियों की तरह सामान्य पुनरीक्षित वेतनमान देने के फैसले पर मुहर लगा दी है।
इसके साथ सारे विवादों का पटाक्षेप भी हो गया। खादी ग्रामोद्योग बोर्ड ने शासन के 20 मई 1968 के एक आदेश के आधार पर 18 दिसंबर 2008 को अपने कर्मचारियों को राज्य कर्मचारियों की तरह 60 साल पर रिटायर करना शुरू कर दिया था।
इसके पहले रिटायरमेंट उम्र 58 साल थी। बोर्ड ने इस फैसले को एक जनवरी 2006 से लागू किया था।
बाद में वित्त विभाग ने बोर्ड को स्वायत्तशासी संस्था मानते हुए बिना शासन की इजाजत लिए रिटायरमेंट की आयुसीमा 58 से बढ़ाकर 60 साल करने के फैसले पर पर आपत्ति जता दी।
इसके बाद मामला उलझ गया। बोर्ड शासन के आदेश पर फैसले का हवाला देकर आयुसीमा बढ़ाने को उचित ठहरा रहा था पर बात वसूली तक पहुंच गई।
इसके बाद मामला हाईकोर्ट पहुंच गया जिससे विभाग रिकवरी के फैसले का अनुपालन नहीं करा सका।
मामले में लिखापढ़ी ज्यादा गंभीर हुई तो परेशान बोर्ड कर्मियों ने शासन पर बोर्ड के फैसले की कार्येतर स्वीकृति दिलाने का दबाव बढ़ा दिया था।
बुधवार को कैबिनेट की बैठक में इस प्रस्ताव पर विचार हुआ। इस फैसले से बोर्ड कर्मियों ने राहत की सांस ली है।