डॉ. सौरभ के मुताबिक 16 मार्च को अनजान नंबर से उनकी मां के पास कॉल आई थी। थोड़ी देर बाद दूसरे नंबर से व्हाट्सएप कॉल आई। कॉल करने वाले ने खुद को एटीएस का अधिकारी बताया। ठग ने कहा कि आप दोनों का आधार नंबर, बैंक खाता मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवादी गतिविधियों में इस्तेमाल किया गया है। ठग ने महेश को भी फोन किया और उनसे कहा कि इस मामले में कानूनी जांच चल रही है। जांच पूरी होने तक दंपती किसी से बात नहीं करेंगे और न ही इस संबंध में किसी को कोई जानकारी देंगे। ठगाें ने धमकी दी कि उन्होंने किसी से कुछ साझा किया तो तुरंत पुलिस भेजकर गिरफ्तार कर लिया जाएगा। फोन करने वाले ने दंपती को एक ही स्थान पर बैठने और मोबाइल का कैमरा लगातार ऑन रखने के लिए बाध्य किया।
तीन दिन तक करते रहे निगरानी, एफडी तोड़वाई
ठगों ने 16 मार्च को दोपहर 3:25 बजे से 18 मार्च की रात 8:30 बजे तक दोनों को डिजिटल अरेस्ट कर रखा। आरोपी लगातार वीडियो कॉल पर निगरानी करते रहे। ठगों ने बैंक भेजकर रुपये खातों में ट्रांसफर करवा लिए। बैंक जाते समय दंपती को धमकाया गया। ठगों ने कहा कि किसी से कुछ भी बताया तो परिवार के सदस्यों, यहां तक की बच्चों को भी नुकसान पहुंचाया जाएगा। डर के कारण महेश ने फिक्स्ड डिपॉजिट तोड़वाकर 12.90 लाख रुपये ठगों के कर्नाटक स्थित बैंक खाते में स्थानांतरित कर दिए।
पुलिस को उपलब्ध कराए साक्ष्य
पीड़ित ने पुलिस को आरोपियों के बैंक खाते, व्हाट्सएप चैट, फोन नंबर उपलब्ध कराए हैं। साइबर थाने के प्रभारी ब्रजेश कुमार के मुताबिक आरोपियों के बैंक खाते खंगाले जा रहे हैं। ठगों ने एक्सिस बैंक में रकम मंगवाई थी। आरोपियों के बारे में पता लगाया जा रहा है। जल्द ही उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाएगा।