लखनऊ। साइबर ठगों ने सेवानिवृत्त मेजर जनरल को विदेशी महिला की मदद और चार अन्य को शेयर ट्रेडिंग का झांसा दिया। फिर उनकी मेहनत के 1.74 करोड़ रुपये ऐंठ लिए। पीड़ितों ने आरोपियों के खिलाफ साइबर क्राइम थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई है।
आशियाना के सेक्टर-जे निवासी मनोज तिवारी सेना में मेजर जनरल के पद से सेवानिवृत्त हैं। इस समय वह आईटी कंपनी में काम कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि 2012-13 में उनकी मुलाकात न्यूयॉर्क में निकोल एंडरसन से हुई थी। कुछ दिन पहले सुबह उनके पास अनजान नंबर से काॅल आई।
फोनकर्ता ने खुद को इमीग्रेशन ऑफिसर योना गुप्ता बताया। उसने बताया कि निकोल भारत आई है। उसके पास डिमांड ड्राफ्ट है। पर इसका पेपर वर्क नहीं हुआ है। ऐसे में एयरपोर्ट पर उसने पेनाल्टी की कुछ रकम भरी है। बची हुई आप भर दीजीए। वह ठग की बाताें में आ गए और नौ बार में 18.54 लाख उसे ट्रांसफर कर दिए। इसके कुछ दिन बाद उन्हें ठगी की जानकारी हुई।
उधर, जानकीपुरम सेक्टर डी निवासी सरकारी शिक्षक उमेश चंद्र त्यागी ने बताया कि 20 जून को मैट्रिमोनियल एप के जरिये उनकी दोस्ती ईशा देसाई से हुई थी। मुलाकात में उसने खुद को मुंबई की टेक्सटाइल कंपनी का मालिक बताया। उसने शेयर में निवेश करने का झांसा दिया। उन्होंने कई बार में 49 लाख ठग के बताए गए एप में जमा कर दिए। कुछ दिन बाद एप में उन्हें एक करोड़ का मुनाफा दिखा तो उन्होंने निकालने की कोशिश की। पर ईशा ने उन्हें मुनाफा देने से मना कर दिया। विरोध पर ठग ने उन्हें ईडी व अन्य कानूनी कार्रवाई की धमकियां देनी शुरू कर दी।
कैसरबाग के लाटूश रोड पर रहने वाले 80 वर्षीय अतुल कुमार गौतम से ठग ने व्हाट्सएप के जरिये संपर्क किया। फिर निवेश कर मुनाफा कमाने का झांसा देते हुए उन्हें एप डाउनलोड कराया। इसके बाद 24.5 लाख रुपये निवेश कराकर पूरी रकम हड़प ली। इसी तरह इंदिरानगर सेक्टर-13 निवासी ओम नारायण श्रीवास्तव से 7.11 लाख और जानकीपुरम निवासी ज्योति भूषण सिंह से 75 लाख हड़प लिए गए।
इंस्पेक्टर ब्रजेश यादव ने बताया कि सभी मामले की तफ्तीश की जा रही है। साथ ही संबंधित बैंकों से संपर्क कर पीड़ितों की रकम को फ्रीज कराने की कोशिश की जा रही है।