साइबर क्राइम थाने के इंस्पेक्टर ब्रजेश कुमार के मुताबिक ठगों ने 15 दिसंबर 2025 को वीरेंद्र सिंह के पास फोन किया था। कॉल करने वाले ने खुद को ट्राई का संजय शर्मा बताया। ठग ने कहा कि आपके खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग के 17 मामले दर्ज हैं। इसकी जांच सीबीआई कर रही है। ठग ने तीन फोन नंबर दिए और कहा कि आपको नई दिल्ली के बाराखंभा पुलिस स्टेशन में बात करनी होगी। झांसे में आए वीरेंद्र ने दिए गए नंबर पर फोन किया तो उन्हें गिरफ्तार करने की धमकी दी गई। डर के कारण उन्होंने दूर से ही जांच में सहयोग के लिए हामी भर दी। वीरेंद्र ने पत्नी को भी शामिल कर लिया। ठगों ने 71 वर्षीय वीरेंद्र से कहा कि वह निर्दोष हैं, इसका आवेदन भेजें। वीरेंद्र ने व्हाट्सएप पर आवेदन भेज दिया। करीब एक माह तक ठगों ने वीरेंद्र से बात की और उनका भरोसा जीतकर उनके व्यक्तिगत व वित्तीय विवरण हासिल कर लिए।
संपत्ति जब्त करने की दी थी धमकी
वीरेंद्र सिंह का कहना है कि ठगों ने दूसरे व्यक्ति को सीबीआई का बड़ा अफसर बताकर वीडियो कॉल पर बात कराई। कथित अफसर प्रदीप कुमार ने वीरेंद्र के खाते फ्रीज करने, संपत्ति जब्त करने एवं बदनाम करने की धमकी दी। ठगों ने वीडियो कॉल पर आरबीआई और न्यायालय का अधिकारी बताकर जांच, जमानत और क्लियरेंस के नाम पर उनसे अलग-अलग खातों में रकम स्थानांतरित करवा ली।
16 जनवरी से 27 फरवरी तक ट्रांसफर किए रुपये
पीड़ित का कहना है कि 16 जनवरी 2026 से 27 फरवरी तक ठगों ने कुल एक करोड़ 17 लाख 90 हजार रुपये ट्रांसफर करवा लिए। वीरेंद्र के मुताबिक ठगाें ने उनसे निवेश समाप्त करने, सोना गिरवी रखने और परिवार से धन उधार लेने के लिए भी मजबूर किया। उन्होंने बार-बार गोपनीयता बनाए रखने के लिए कहा और परिवार को नुकसान पहुंचाने की भी धमकी दी। रकम वसूलने के बाद ठगों ने बताया कि आपको निर्दोष घोषित कर दिया गया है। जमानत के लिए अंतिम भुगतान करना होगा। अंतिम भुगतान करने के बाद आरोपियों ने संपर्क तोड़ दिया। एक ठग अभी भी उनसे संपर्क कर रहा है। रकम वापस नहीं मिलने पर वीरेंद्र सिंह ने बच्चों को मामले की जानकारी दी। उन्होंने ठगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।