जल निगम से सेवानिवृत्त हुए करीब सात हजार लोगों को चिकित्सा
प्रतिपूर्ति का लाभ फिर से मिल सकता है।
शासन ने चिकित्सा प्रतिपूर्ति
सुविधा बंद किए जाने पर जल निगम पर सवाल उठाया है कि आखिर किसके आदेश पर
ऐसा किया गया।
शासन के नगर विकास विभाग की
ओर से यह आदेश उत्तर प्रदेश जल निगम पेंशनर्स एसोसिएशन की ओर से चिकित्सा
प्रतिपूर्ति बंद किए जाने के विरोध में भेजे गए ज्ञापन के बाद दिया है।
उप
सचिव उमाशंकर सिंह की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि जल निगम के
रिटायर्ड कर्मचारियों को राजकीय कर्मचारियों की तरह चिकित्सा प्रतिपूर्ति
की सुविधा दिए जाने का आदेश 3जुलाई 2008 को जारी किया गया था और उसमें अब
तक कोई संशोधन नहीं किया गया है।
जल निगम पेंशनर्स एसोसिएशन ने यह ज्ञापन
दिया है कि जल निगम प्रशासन ने गत 6जून से चिकित्सा प्रतिपूर्ति बंद कर दी
है। जबकि शासन से ऐसा कोई आदेश ही नहीं दिया गया।
इस
बारे में जल निगम के प्रबंध निदेशक एके मित्तल ने कहा कि जल निगम बोर्ड ने
कुछ गंभीर बीमारियों के इलाज में ही 50 प्रतिशत चिकित्सा प्रतिपूर्ति देने
का निर्णय लिया है।
अन्य बीमारियों में यह लाभ नहीं दिया जा रहा है। शासन
का जो आदेश है उसे बोर्ड में रखा जाएगा।
यदि बोर्ड निर्णय लेता है तो
चिकित्सा प्रतिपूर्ति की सुविधा को फिर से शुरू किया कर दिया जाएगा। बिना
बोर्ड की मंजूरी आदेश को लागू नहीं किया जा सकता।
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