यूपी मेडिकल सप्लाई कार्पोरेशन लिमिटेड (यूपीएमएससीएल) ने प्रदेश भर में एजिथ्रोमाइसिन एंटीबायटिक दवा को मरीजों को देने पर रोक लगा दी है। इस दवा के 24 बैच के नमूने ‘मिसब्रांडेड’ पाए गए हैं। सभी सीएमओ, सीएमएस महिला, पुरुष व संयुक्त अस्पतालों में इस दवा के वितरण को रोकने और अस्पतालों में वापस मंगाकर अलग रखने के निर्देश दिए हैं।
यूपीएमएससीएल को आपूर्ति की गई एक और दवा गुणवत्ता के अनुरूप नहीं पाई गई है। कार्पोरेशन के प्रबंधक गुणवत्ता नियंत्रक ने प्रदेश के सभी अस्पतालों के सीएमएस, जिलों के सीएमओ को मेसस टेरेस फार्मास्युटिकल प्रा.लि. की एजिथ्रोमाइसिन सस्पेंशन 100 मिलीग्राम/5 मिलीलीटर को मरीजों को न देने के निर्देश दिए हैं। यह दवा जुलाई में कंपनी ने आपूर्ति की थी। इन नमूनों की जांच कार्पोरेशन से अनुबंधित लैब में जांच के लिए भेजे गए थे। यूपीएमएससीएल के अधिकारियों के अनुसार इस दवा के बैच नंबर टीएल-19071 से 19097 तक ‘मिसब्रांडेंड’ पाए गए हैं।
इससे पहले भी यूपीएमएससीएल को आपूर्ति की गई कई दवाएं मानक अनुरूप नहीं पाई गई हैं। हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले की मेसर्स पुष्कर फार्मा की आई ड्रॉप कार्बोजाईमिथाइल सेल्यूलोज सोडियम 0.5 प्रतिशत जांच रिपोर्ट में इंडियन फार्मोकोपिया में निर्धारित मानक के अनुरूप नहीं पाए गए थे। इसके वितरण भी पर रोक लगाई गई थी। इसी तरह चंडीगढ़ के मेसर्स एरियॉन हेल्थ केयर से आपूर्ति की गई बैच नंबर एसबीएल 565 मॉक्सीफ्लॉक्सासिन हाइड्रोक्लोराइड 0.5 आई ड्रॉप को वापस मंगाया था।
इसके अलाव सितंबर माह में पंचकुला हरियाणा की बनी अलायंस बॉयोटेक लिमिटेड के बैच नंबर एएजी-095 आयरन सुक्रोज इंजेक्शन को वापस लेने के भी निर्देश जारी किए जा चुके हैं। इसके अलावा रुड़की उत्तराखंड की कंपनी मेसर्स ओमेगा फार्मा से एरिथ्रोमाइसिन स्टीयरेट टैबलेट 250 मिलीग्राम बैच नंबर जीपीटी005 की आपूर्ति 13 नवंबर 2018 को विभिन्न अस्पतालों में की गई थी। सेंट्रल ड्रग्स लेबोरेट्री (सीडीएल) कोलकाता से कराई गई। जांच में एरिथ्रोमाइसिन गुणवत्ता में मानक के अनुसार नहीं पाई गई थी।