लखनऊ। जिस राष्ट्र के नागरिक और वहां का समाज साहित्य और अपने साहित्यकार का सम्मान नहीं करता, वह देश अपनी परंपरा को लंबे समय तक जीवित नहीं रख पाता है। यह बातें भाऊराव देवरस सेवा न्यास की ओर से निरालानगर के सरस्वती कुंज के माधव सभागार में आयोजित 30वें पं. प्रताप नारायण मिश्र स्मृति युवा साहित्यकार सम्मान समारोह में मुख्य अतिथि मध्यप्रदेश के महर्षि महेश योगी वैदिक विवि के कुलपति प्रो. प्रमोद कुमार वर्मा ने कहीं।
उन्होंने कहा कि पं. प्रताप नारायण मिश्र का संपूर्ण जीवन कर्मठता की प्रतिमूर्ति रहा। दिल्ली संस्कृत अकादमी के सचिव अध्यक्ष डॉ. अरुण कुमार झा ने कहा कि सनातन मूल्य व आदर्श से ओत-प्रोत व्यक्तित्व भाऊराव और पंडित प्रताप मिश्र का रहा।
सम्मान समारोह में काव्य विधा में लखीमपुर खीरी के राघव शुक्ल, कथा-साहित्य विधा में मध्य प्रदेश के उज्ज्वल मल्हावनी, पत्रकारिता विधा में पटना के रविशंकर उपाध्याय, बाल-साहित्य विधा में मथुरा के संतोष ‘ऋचा’, संस्कृत में अगरतला के डॉ. विश्वबंधु, तमिल भाषा में चेन्नई के डॉ. मधुसूदन कलैचेलवन को सम्मानित किया गया। इस अवसर पर सांस्कृतिक गतिविधियां भी हुईं। कार्यक्रम के संयोजक प्रो. विजय कर्ण, रंजीव तिवारी, अनुज चौबे, धनंजय पांडेय व शिवम अवस्थी आदि उपस्थित रहे।