प्रदेश के विभिन्न चिकित्सा संस्थानों एवं मेडिकल कॉलेजों में डीएम- एमसीएच के सेवा विस्तार दिया जा रहा है। ऐसे में डीएम और एमसीएच छात्रों का कहना है कि वे पहले से सीनियर रेजिडेंट रहे हैं। ऐसे में दोबारा इसी पद पर कार्य करना अनुचित है।
चिकित्सा संस्थानों में डीएम और एमसीएच छात्रों को सेवा विस्तार के दौरान सीनियर रेजिडेंट पद पर तैनात किए जाने केविरोध में रेजिडेंट डॉक्टरों ने बुधवार को बांह पर काली पट्टी बांध कर कार्य किया। वे असिस्टेंट प्रोफेसर का मानदेय और कार्य अनुभव की मांग कर रहे हैं। गुरुवार को कैंडल मार्च निकालेंगे। एसजीपीजीआई के छात्र मांगें नहीं माने जाने पर 27 को होने वाले दीक्षांत समारोह का बहिष्कार कर सकते हैं। हालांकि इस मुद्दे पर छात्रों ने दो दिन बाद बैठक कर फैसला लेने की बात कही है।
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प्रदेश के विभिन्न चिकित्सा संस्थानों एवं मेडिकल कॉलेजों में डीएम- एमसीएच के सेवा विस्तार दिया जा रहा है। ऐसे में डीएम और एमसीएच छात्रों का कहना है कि वे पहले से सीनियर रेजिडेंट रहे हैं। ऐसे में दोबारा इसी पद पर कार्य करना अनुचित है। नेशनल मेडिकल कमीशन की नियमावली में यह प्रावधान है कि सीनियर रेजिडेंट को असिस्टेंट प्रोफेसर का मानदेय दिया जा सकता है। इसी के तहत ये छात्र मांग कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री, चिकित्सा शिक्षा मंत्री, महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा एवं प्रशिक्षण, मुख्य सचिव चिकित्सा शिक्षा आदि को ज्ञापन देने के बाद बुधवार को छात्रों ने आंदोलन का ऐलान कर दिया। एसजीपीजीआई, केजीएमयू, लोहिया संस्थान सहित विभिन्न मेडिकल कॉलेजों के डीएम व एमसीएच छात्रों ने बांह पर काली पट्टी बांध कर कार्य किया। एसजीपीजीआई के रेजिडेंट रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष डा. आकाश माथुर एवं महामंत्री अनिल गंगवार ने बताया कि बुधवार को सभी छात्र विरोध में शामिल रहे। उन्होंने बताया कि कैंडल मार्च के बाद बैठक कर अगली रणीनीति बनाई जाएगी। जरूरत पड़ी तो दीक्षांत समारोह का बहिष्कार भी किया जा सकता है।