भाजपा खास तौर पर दलित मतदाताओं पर नजर गड़ाए हुए है। सरकार ने मंत्रिमंडल विस्तार किया तो इसका खास ख्याल रखा और दलितों को तरजीह दी। सुरक्षित सीटों से जीतकर आए विधायकों को मंत्री बनाकर यह संदेश देने की कोशिश की गई कि भाजपा दलितों का खास ख्याल रख रही है। भगवा खेमे की पूरी मंशा आरक्षित वर्ग के साथ वैश्य, ठाकुर, गुर्जर, ब्राह्मण, त्यागी, अति पिछड़ा वर्ग को साथ लाने की है।
बसपा से आए सूरमा चला रहे सपा के तीर
वहीं, सपा ने भी इन सीटों पर अपना तीर चल दिया है। बसपा छोड़कर सबसे ज्यादा नेता सपा में आ रहे हैं। सपा इसी तीर से दूसरे दलों को धराशायी करना चाह रही है। खासतौर से बसपा छोड़कर आए अनुसूचित जाति के नेताओं को इन सीटों पर लगाया गया है। फिलहाल कैबिनेट मंत्री केके गौतम को इसी लक्ष्य को साधने की जिम्मेदारी दी गई है। कांग्रेस भी ऐसे ही समीकरण बनाने में जुटी है। लखीमपुर क्षेत्र में पंजाब के सीएम चरण सिंह चन्नी ने जिस तरह से कई बार अपनी आमद दर्ज कराई, उससे भी कांग्रेस की रणनीति साफ हो जाती है।
2017 में भाजपा सबसे ऊपर
अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित दोनों सीटें सोनभद्र जिले में हैं। भाजपा ने 2017 में अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित 69 तो अनुसूचित जनजाति की 1 सीट यानी 70 सीटें जीत लीं। अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित दूसरी सीट भाजपा के सहयोगी अपना दल ने जीती। वहीं, अपना दल व सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी ने एससी के लिए आरक्षित 3-3 सीटों पर जीत दर्ज की थी। तो दूसरी तरफ सपा ने 7, बसपा ने 2 और 1 सीट निर्दलीय उम्मीदवार ने जीती थी। भाजपा और उसके सहयोगी दलों की आरक्षित सीटों पर सामूहिक सफलता दर 88 फीसदी रही। भाजपा सरकार बनाने में कामयाब रही।
1993 में आरक्षित सीटें-93
भाजपा सपा बसपा अन्य
38 23 23 09
1996 में आरक्षित सीटें-93
36 18 20 22
2002 में आरक्षित सीटें-89
35 18 24 12
2007 में आरक्षित सीटें-89
07 13 62 06
2012 में आरक्षित सीटें-85
03 58 15 09
2017 में आरक्षित सीटें-86
70 07 02 07