लखनऊ। विवाहित महिलाओं के लिए होने वाली सौंदर्य प्रतियोगिताएं उनके लिए न सिर्फ सेल्फ प्रमोशन का जरिया बन रही हैं बल्कि उनके बिजनेस प्रमोशन और आत्मविश्वास बढ़ाने में भी सहायक सिद्ध हो रही हैं। यह बात एक शोध में सामने आई है। लखनऊ विवि के समाजकार्य विभाग की शोधार्थी जेबा फातिमा ने मिसेज ब्यूटी कॉन्टेस्ट की प्रतिभागियों पर एक शोध किया है जिसमें वर्ष 2016 से 2023 के बीच विभिन्न देशों में हुईं प्रतियोगिताओं और उनकी प्रतिभागियों को शामिल किया गया है।
जेबा ने बताया कि मेरा शोध इस विषय पर था कि शादी के बाद सौंदर्य प्रतियोगिता में हिस्सा लेने वाली महिलाओं की जिंदगी और उनके परिवार में क्या बदलाव आते हैं। मैंने इन महिलाओं के पारिवारिक रिश्तों, भूमिकाओं और सामाजिक छवि पर प्रभाव की भी पड़ताल की। विभाग के प्रो. अनूप कुमार भारतीय के निर्देशन में शोध करने वाली जेबा का कहना है कि प्रतियोगिता की तैयारी में लगने वाला समय, घरेलू जिम्मेदारियों में संभावित असंतुलन, मानसिक दबाव, पारिवारिक मतभेद और सामाजिक टिप्पणियों जैसे पहलुओं का भी अध्ययन किया। अध्ययन में मिलस्टोन मिसेज इंडिया इंटरनेशनल पेजेंट की ओर से 2016 से 2023 तक आयोजित प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले चुकी विवाहित महिलाओं को शामिल किया गया। इस गुणात्मक शोध में प्राथमिक व द्वितीयक दोनों स्रोतों से आंकड़े जुटाए जाएंगे। प्रतिभागियों से साक्षात्कार किया गया।
जेबा के अनुसार, शोध में सामने आया कि विवाहित महिलाओं को इन प्रतियोगिताओं में शामिल होने के लिए पति और बच्चों समेत परिवार का अधिक सहयोग मिला। प्रतिभागियों में डॉक्टर, इंजीनियर, प्रबंधक, व्यवसायी व अन्य पेशेवर महिलाएं अधिक मिलीं। सौंदर्य प्रतियोगिताओं में शामिल होने के पीछे इनका एक उद्देश्य यह भी रहा कि वे अपना प्रोफेशनल प्रमोशन भी कर सकती हैं, इसका उन्हें लाभ भी मिला। साथ ही उनमें आत्मविश्वास भी बढ़ा।
जेबा ने शोध के लिए की सात देशों की यात्रा
जेबा फातिमा ने बताया कि शोध के लिए उन्होंने सात देशों की यात्रा भी की जहां इन सौंदर्य प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। इनमें पेरिस, दुबई, मलयेशिया, रूस, साउथ अफ्रीका, थाईलैंड और सिंगापुर शामिल हैं।