वह पार्क जहां 26 दिसंबर 1916 को जवाहर लाल नेहरू व महात्मा गांधी मिले।
नेहरू ने इस बारे में अपनी आत्मकथा में भी जिक्र किया है। लिखा है कि गांधीजी साउथ अफ्रीका में हुई घटना को लेकर कैसे आगे आए और इसके बाद अहिंसा आंदोलन व चम्पारण जीत वगैरह का जिक्र किया है। नेहरू ने गांधीजी को देश के युवाओं और मजदूर वर्ग की ओर ध्यान देने की अपील की थी। नेहरू चाहते थे कि गांधी देश के मजदूरों को विदेशों में जाकर काम करने से रोकें।
दरअसल, उस वक्त अंग्रेजी हुकूमत हिंदुस्तानियों को अफ्रीका, कैरिबियाई देशों, फिजी जैसे देशों में मजदूरी के लिए ले जाया करते थे, जिसका विरोध किया गया। इस बिल को नेहरू ने कांग्रेसियों के सामने रखा था, जिसका गांधीजी ने समर्थन भी किया था।
इसके बाद जब चारबाग रेलवे स्टेशन का विस्तार हुआ और देश आजाद हुआ तो रेलवे ने इन यादगार लम्हों को संजोने के लिए वहां गांधी उद्यान बना दिया, जहां हेरिटेज इंजन रखा हुआ है और एक शिलापट्ट भी लगा है, जिसमें इस मुलाकात का जिक्र है।
पंडित नेहरू व महात्मा गांधी।
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का लखनऊ आना-जाना रहता था, लेकिन आजादी के कुछ बरस पहले, जब वह लखनऊ आए तो यहां गोखले मार्ग पर कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष शीला कौल के घर गए थे, जहां अपने हाथों से उन्होंने एक पौधा लगाया था, जो पेड़ बन गया।
ऐसे ही महिलाओं की आजादी को लेकर महात्मा गांधी हमेशा पक्षधर थे। अमीनाबाद में उन्होंने महिलाओं के लिए एक पार्क की नींव डाली, जिसे जनाना पार्क के नाम से जाना जाता है।