रायबरेली। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) स्कूलों में बच्चों की सेहत जांचने के लिए टीमों को मिले वाहन मानकों पर खरे नहीं हैं। टेंडर की शर्तों के विपरीत और अनफिट वाहनों की शिकायत पर सीएमओ ने सभी सीएचसी अधीक्षकों से रिपोर्ट तलब की है। पुराने मॉडल के 19 वाहन लगाए गए हैं। इसमें 11 साल पुराने वाहन भी शामिल है। किसी का टैक्स जमा नहीं तो किसी का परमिट और बीमा तक वैध नहीं है।
मामला राष्ट्रीय कार्यक्रम को संचालित कराने के साथ ही पर्यवेक्षण के लिए 56 वाहनों की टेंडर प्रक्रिया स्वास्थ्य विभाग में पिछले माह पूरी हो गई थी। विभाग ने प्रिलेंस ग्लोबल प्राइवेट लिमिटेड प्रतापगढ़ को यह काम दिया है। अब फर्म ने विभाग को वाहन उपलब्ध कराए हैं, जिसमें 19 पुराने वाहन टेंडर की शर्तों के विपरीत दिए हैं। इनमें से कई वाहनों का तो रोड टैक्स तक जमा नहीं है।
डलमऊ सीएचसी में लगे वर्ष 2014 के वाहन का बीमा तक खत्म हो गया है। इसके अलावा तमाम ऐसे वाहन हैं, जिनके परमिट और फिटनेस खत्म हो चुके हैं। ऐसे में इन वाहनों से स्कूलों के लिए जाने वाली स्वास्थ्य विभाग की टीम के सदस्यों को जान हथेली पर रख कर सफर करना पड़ेगा।
अनफिट व बिना बीमा के वाहन सीएचसी को उपलब्ध कराए जाने की सूचना मिलने के बाद मंगलवार को सीएमओ डॉ. नवीन चंद्रा ने सभी सीएचसी अधीक्षकों को संबंधित गाड़ियों का पूरा ब्योरा देने का आदेश दिया है। उन्होंने वर्ष 2021 से पुराने वाहनों के संबंध में भी पूरी जानकारी मांगी है। बताया कि टेंडर की शर्तों के विपरीत कोई भी वाहन संचालित नहीं होने दिया जाएगा।