रंगमंच की कद्दावर पहचान, लेखक और लखनऊ दूरदर्शन के पूर्व निदेशक विलायत जाफरी अब हमारी बीच नहीं रहे। बीती दो अक्तूबर को ही 88 वर्ष की आयु पूरी करने वाले विलायत जाफरी ने सोमवार को मुंबई स्थित आवास पर आखिरी सांस ली।
वे बीते कुछ समय से बीमार चल रहे थे। तीन पुत्रियों के अलावा परिवार में उनकी रंगकर्मी पत्नी कृष्णा जाफरी और कलाकार पुत्र अंबर जाफरी हैं। जाफरी परिवार के करीबी फिल्मकार और निर्देशक निशीथ चंद्रा ने बताया कि सोमवार सुबह 7 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली।
उनका अंतिम संस्कार 7 अक्तूबर को उनके पैतृक आवास रायबरेली में होगा। मंगलवार दोपहर से पहले उनका पार्थिव शरीर लखनऊ स्थित उनके आवास पर लाया जाएगा, जहां से अंतिम संस्कार के लिए रायबरेली ले जाया जाएगा।
देश में लाइट एंड साउंड प्रोग्राम की शुरुआत करने वाले विलायत जाफरी कुछ समय पहले ही कोरोना को हराकर घर लौटे थे, लेकिन पुरानी बीमारी के चलते उनका स्वास्थ्य गिरता गया। बीते करीब एक साल से वो मुंबई में ही रहकर अपना इलाज करा रहे थे। उधर, उनके निधन की सूचना से लखनऊ में भी उनके कद्रदानों और संस्कृति कर्मियों में शोक छा गया।
लाइट एंड साउंड प्रोग्राम के जनक थे विलायत
विलायत जाफरी को देश में लाइट एंड साउंड प्रोग्राम का जनक माना जाता है। 70 के दशक में उन्होंने इसकी शुरुआत की थी। एक से बढ़कर एक चर्चित कार्यक्रम उन्होंने कला जगत को दिए। उनके कुछ मशहूर लाइट एंड साउंड प्रोग्राम पुराना किला दिल्ली, बढ़ते कदम लखनऊ, बहादुर शाह जफर, हुमायूं मकबरा दिल्ली, गालिब जहाज महल, महरौली दिल्ली, अनारकली चंडीगढ़ और इस तरह के लगभग 20 से अधिक कार्यक्रम पूरे भारत भर में किए।
संस्कृतिकर्मी निधन से दुखी
भारतीय जन नाट्य संघ (इप्टा), प्रगतिशील लेखक संघ, साझी दुनिया एवं ऑल इंडिया कैफी आजमी अकादमी ने प्रसिद्ध लेखक, नाटककार, निर्देशक, फिल्मकार एवं दूरदर्शन के पूर्व निदेशक विलायत जाफरी के निधन पर गहरा शोक जताया।
साझी दुनिया की ओर से रूपरेखा वर्मा, इप्टा की ओर से राकेश, प्रगतिशील लेखक संघ की ओर से सूरज बहादुर थापा तथा कैफी आजमी अकादमी की ओर से सैयद मेंहदी ने श्रद्धांजलि दी। इप्टा के महासचिव राकेश ने सोमवार को बयान जारी कर कहा कि मूल रूप से रायबरेली निवासी विलायत जाफरी के परदादा को 1857 में फांसी की सजा हुई थी।
उनके दादा और पिता स्वतंत्रता आंदोलन में जेल भी गए। 50 के दशक में वे दिल्ली में कुदीशिया बेगम, हबीब तनवीर तथा शीला भाटिया के साथ इप्टा में शामिल हुए। बाद में वे आकाशवाणी और दूरदर्शन के साथ जुड़ गए।
उन्होंने लाइट और साउंड के माध्यम से कई अभूतपूर्व प्रस्तुतियां दीं, जिनमें रेजीडेंसी में 1857 पर हुई प्रस्तुति की छाप अभी भी लोगों के जेहन में बरकरार है। इसके अलावा बहादुर शाह जफर, शाहजहां, मिर्जा गालिब, बढ़ते कदम जैसी प्रस्तुतियां भी उन्होंने दीं। उन्होंने दूरदर्शन के लिए नीम का पेड़, शतरंज के मोहरे, आधा गांव समेत कई पटकथाएं लिखीं।
सराय के बाहर, शोहरत, जहर कौन पिए, एक जमा दो, अंधेरे से उजाले तक, मिर्जा शोहरत उनके चर्चित नाटक हैं। वे अपनी पत्नी मशहूर अभिनेत्री एवं रंगकर्मी कृष्णा जाफरी के साथ इप्टा के आजीवन सदस्य थे। ऑल इंडिया कैफी आजमी एकेडमी लखनऊ के संरक्षक होने के साथ लेखन, नाट्य एवं सांस्कृतिक गतिविधियों में हमेशा शामिल रहते थे।
उनके निधन पर नगर के वरिष्ठ रंगकर्मी गोपाल सिन्हा, अंशु टंडन, विनोद मिश्रा, अजय द्विवेदी, केशव पंडित, मुकेश वर्मा, अनुपम बिसारिया रवि कांत शुक्ला, शिबू, अर्चना शुक्ला ने श्रद्धांजलि दी और सोशल मीडिया पर उनसे जुड़ी अपनी यादें साझा की।
संगीत नाटक अकादमी के अकादमी रत्न थे विलायत
आकाशवाणी और दूरदर्शन के कई पदों पर रहने के अलावा लखनऊ दूरदर्शन के निदेशक रहे विलायत जाफरी को पिछले साल ही उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी की ओर से अकादमी रत्न सम्मान से नवाजा गया था। इसके अलावा उन्हें उर्दू अकादमी दिल्ली अवॉर्ड, कबीर अवॉर्ड, उर्दू अकादमी उत्तर प्रदेश अवॉर्ड, यूपी रतन अवॉर्ड, यूरोप का टीवी अवॉर्ड समेत कई अवॉर्ड और सम्मान से सम्मानित किया गया था। कहानियों और नाटकों की उनकी 9 किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं।
उनके कहानी संग्रह गुस्ताखियां को उर्दू अकादमी उत्तर प्रदेश का अवॉर्ड मिला, जबकि नाटक जहर कौन पिये को उर्दू अकादमी दिल्ली ने अवार्ड से सम्मानित किया। जून, 2019 में मिर्जा गालिब पर तैयार किए गए लाइट एंड साउंड पर आधारित पुस्तक गालिब के विमोचन के मौके पर वे सार्वजनिक आयोजनों में मंच पर दिखे थे। 90 के दशक में नीम का पेड़ धारावाहिक उनकी न भूलने वाली कृति कही जाती है।