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Lucknow News: खून से हानिकारक वसा निकाल बचाई जान

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लखनऊ। दुर्लभ आनुवंशिक बीमारी (होमोजाइगस फैमिलियल हाइपरकोलेस्ट्रोमेलिया) से जूझ रहे तीन वर्षीय मासूम को संजय गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान के डॉक्टरों ने नया जीवन दिया है। लगातार 20 सप्ताह तक रक्त शोधन कर उसके खून में मौजूद अत्यधिक हानिकारक वसा को निकाला गया। डॉक्टरों का दावा है कि इतनी कम उम्र के बच्चे में इस बीमारी के इलाज का यह देश में पहला मामला है।
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ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग के डॉ. भरत सिंह ने बताया यह बीमारी पांच लाख बच्चों में से किसी एक को होती है। इसमें जन्म से ही शरीर खून से खराब वसा को नहीं निकाल पाता है। यह वसा त्वचा और नसों में जमने लगती है। इससे हृदय की नलियां सिकुड़ जाती हैं और कम उम्र में ही दिल के दौरे से मौत तक हो सकती है।

दवाओं से नहीं घट रहा था वसा का स्तर
बच्चे की प्रारंभिक जांच अनुवंशिकीय विभाग में हुई। डॉ. अमिता मोइरांगथेम ने दुर्लभ रोग की पहचान की। जांच में बच्चे के खून में वसा का स्तर 854 पाया गया, जबकि सामान्य स्तर 170 से कम होता है। अधिक मात्रा में दवाएं देने पर भी वसा का स्तर कम नहीं हो रहा था। इसके बाद बच्चे को रक्त आधान औषधि विभाग भेजा गया।
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20 सप्ताह तक चली इलाज की प्रक्रिया
डॉ. भरत ने बताया कि विशेष रक्त छनन प्रक्रिया महंगी थी। ऐसे में टीम ने बच्चे की उम्र के अनुसार विशेष रक्त शोधन तरीका अपनाया। इसमें बच्चे के खून को एक यंत्र से गुजारा गया। इसने वसा वाले दूषित तरल को अलग कर दिया और बाकी शुद्ध खून को वापस शरीर में पहुंचा दिया। 20 सप्ताह तक ऐसा किया गया। इसमें हर सप्ताह एक बार यह प्रक्रिया की गई। बच्चे को इस दौरान कोई परेशानी भी नहीं हुई। उसकी त्वचा पर दिखने वाले वसा जमाव में भी काफी कमी आई है। संस्थान के निदेशक प्रो. आरके धीमन ने उपलब्धि पर प्रो. प्रीति एल्हेंस, प्रो. अनुपम वर्मा, डॉ. अजय जोसेफ और पूरी टीम को बधाई दी है।
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