आलू के दाम लगातार गिर रहे हैं। इस साल 6.94 लाख हेक्टेअर भू-भाग में आलू की बोआई हुई। 242 लाख मीट्रिक टन से ज्यादा आलू की पैदावार होने का अनुमान है। रकबा और पैदावार दोनों ही बढ़े तो आलू के दाम गिर गए। कोल्ड स्टोरों में जगह न होने के कारण आलू सीधा मंडियों में पहुंचा, जिसका परिणाम यह रहा कि आलू का रेट जमीन पर आ गया। इसका एक बड़ा कारण यह भी रहा कि आलू की अगैती फसल कम हुई।
नवंबर माह तक तो आलू के दाम चढ़े रहे। इसके बाद एक साथ मंडियों में तगड़ी आवक शुरू हो गई। कृषि उत्पादन आयुक्त मनोज कुमार सिंह ने बताया कि छह मार्च को उन्होंने फर्रुखाबाद मंडी का निरीक्षण किया तो पाया कि मंडल में आलू तीन रुपये प्रति किलो बिक रहा था। उधर दूसरे प्रदेशों जैसे आंध्र प्रदेश और तमिलनाडू में आलू का भाव 12 - 14 रुपये रुपये प्रति किलो था। ऐसे में यह निर्णय लिया गया कि बाजार हस्तक्षेप योजना के तहत उचित गुणवत्ता का आलू सरकार खरीदेगी।
उप्र राज्य औद्यानिक सहकारी विपणन संघ (हाफेड) को पहले चरण में सात जिलों में क्रय केंद्र स्थापित करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही कोल्ड स्टोरेज संचालकों के साथ वीडियो कान्फ्रेंसिंग कर कहा जा रहा है कि आलू के भंडारण में कोई परेशानी न की जाए। प्रत्येक कोल्ड स्टोर पर उद्यान विभाग से कर्मचारी, अधिकारी की ड्यूटी व्यवस्था बनाने के लिए लगाई गई है। कृषि उत्पादन आयुक्त के मुताबिक विशेषकर फर्रुखाबाद, कन्नौज, इटावा, औरैया, बाराबंकी में ई-नीलमी के माध्यम से आलू की बिक्री की जाएगी।