लखनऊ। डॉ. शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय में अब पीएचडी शोधार्थियों को मौखिक परीक्षा पूर्ण होने की तिथि से ही उपाधि दी जाएगी। यह सुविधा केवल सफल अभ्यर्थियों पर लागू होगी। साथ ही स्नातक, परास्नातक और पीएचडी विद्यार्थियों को शोध पत्र प्रस्तुति के लिए वित्तीय सहायता भी दी जाएगी। यह निर्णय विश्वविद्यालय की 40वीं विद्या परिषद की बैठक में लिया गया, जिसमें कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई।
विश्वविद्यालय के प्रवक्ता प्रो. यशवंत वीरोदय ने बताया कि पीएचडी शोधार्थियों को 20 हजार रुपये तक और यूजी व पीजी (ऑनर्स विद रिसर्च) के अंतिम वर्ष के विद्यार्थियों को 10 हजार रुपये तक की सहायता प्रदान की जाएगी। इसके अलावा शिक्षण व्यवस्था में सुधार के लिए विद्यार्थियों से स्टूडेंट फीडबैक फॉर्म भरवाने की व्यवस्था को भी स्वीकृति दी गई है।
बैठक में अंतरराष्ट्रीय छात्रों के प्रवेश और सुविधाओं से संबंधित नियमों को भी मंजूरी दी गई। इसके तहत इंटरनेशनल स्टूडेंट सेल विदेशी छात्रों को प्रवेश से लेकर अध्ययन तक आवश्यक सहयोग प्रदान करेगा, जिससे विश्वविद्यालय की वैश्विक पहचान को मजबूती मिलेगी।
इसके अतिरिक्त, पीएचडी, बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई), रिहैबिलिटेशन काउंसिल ऑफ इंडिया (आरसीआई) और फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया (पीसीआई) से मान्यता प्राप्त पाठ्यक्रमों को छोड़कर कर्मचारियों के बच्चों के लिए 10 प्रतिशत सुपरन्यूमेरेरी सीट, खिलाड़ियों के लिए पांच प्रतिशत स्पोर्ट्स कोटा और स्वतंत्रता सेनानी आश्रितों के लिए दो प्रतिशत आरक्षण जारी रखने का निर्णय लिया गया।
यूजीसी की कॅरिअर एडवांसमेंट स्कीम (सीएएस) के तहत वर्ष 2026 में शिक्षकों की पदोन्नति प्रक्रिया समर्थ पोर्टल के माध्यम से कराए जाने पर भी सहमति बनी। साथ ही दूरस्थ शिक्षा पद्धति (ओपन एंड डिस्टेंस लर्निंग) के जरिये दिव्यांग छात्रों के लिए कौशल विकास पाठ्यक्रम शुरू करने को भी मंजूरी दी गई।
कुलपति आचार्य संजय सिंह के अनुसार, शोधार्थियों को प्रोत्साहन, अंतरराष्ट्रीय अवसरों का विस्तार और पारदर्शी शैक्षणिक व्यवस्था हमारी प्राथमिकता है, जिससे विश्वविद्यालय की राष्ट्रीय और वैश्विक पहचान और मजबूत हो सके।