बच्चों के लिए पार्क व वयस्कों के लिए ओपन जिम भी होगी
इन भवनों में 1832 आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस), 214 निम्न आय वर्ग (एलआईजी) व 456 मध्य आय वर्ग (एमआईजी) श्रेणी के फ्लैट होंगे। निर्माण कार्य अंतिम चरण में है। लगभग 32 वर्गमीटर से 55 वर्गमीटर क्षेत्रफल के यह भवन कम आय वालों के बजट में होंगे। यहां बच्चों के लिए पार्क व वयस्कों के लिए ओपन जिम आदि की सुविधाएं भी होंगी।
भवनों के निर्माण में गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखा गया ताकि रहने वाले लोगों को किसी भी तरह की कोई असुविधा न हो। उपाध्यक्ष ने बताया कि योजना को आम लोगों के लिए जल्द से जल्द खोलने के उद्देश्य से सोमवार को संबंधित अधिकारियों के साथ बैठक की गयी। इसमें जून से भवनों का पंजीकरण खोलने के निर्देश दिए गए हैं। इसके लिए मई के अंत तक सभी तैयारियां पूरी कर ली जाएंगी।
पहले आओ, पहले पाओ के आधार पर होंगे उपलब्ध
एलडीए के अधिशासी अभियंता संजीव कुमार गुप्ता ने बताया कि योजना में निम्न मध्य आय वर्ग (एसएमआईजी) व मध्य आय वर्ग (एमआईजी) के कुल 1520 फ्लैट पहले ही बन चुके हैं। इन्हें पहले आओ-पहले पाओ योजना के तहत आवंटित किया जा रहा है। इच्छुक लोग एलडीए की वेबसाइट के माध्यम से ऑनलाइन बुक करा सकते हैं। एसएमआईजी का क्षेत्रफल लगभग 1032 वर्ग फुट और कीमत लगभग 33 लाख रुपये है। एमआईजी का क्षेत्रफल 977 वर्गफुट व कीमत 31 लाख रुपये है।
फैक्ट फाइल
- ईडब्ल्यूएस फ्लैट : आकार 30 से 32 वर्गमीटर, कीमत 6 लाख रुपये
- एलआईजी फ्लैट : आकार 45 वर्गमीटर, कीमत 12 लाख रुपये
- एमएमआईजी फ्लैट : आकार 55 वर्गमीटर, कीमत 25 लाख रुपये
बसंतकुंज सेक्टर-एक के प्लाटों का बहाल होगा आवंटन
बसंतकुंज योजना के सेक्टर-ए के 272 प्लॉटों का निरस्त किया गया आवंटन बहाल होगा। आवंटियों को रजिस्ट्री कर भूखंडों का कब्जा दिया जाएगा। यह आश्वासन सोमवार को मंडलायुक्त रोशन जैकब ने आवंटियों को दिया। एलडीए की ओर से दो सप्ताह पहले बसंतकुंज योजना सेक्टर- ए के 272 प्लॉटों का आवंटन निरस्त किए जाने के बाद प्रभावित आवंटी आंदोलन की तैयारी में जुटे हैं। एलडीए की कार्रवाई के खिलाफ न्यायालय भी जाने की तैयारी है।
रविवार को आवंटियों ने आवंटीजन कल्याण समिति के बैनर तले बैठक भी की थी। सोमवार को आवंटियों ने मंडलायुक्त से मुलाकात कर उन्हें अपनी परेशानी बताई। सवाल भी उठाया कि आखिर क्यों एलडीए की ओर से मध्यम वर्गीय परिवार के साथ धोखा किया जा रहा है। जो प्लॉट लॉटरी के माध्यम से दो साल पहले आवंटित हुए और लगभग सभी ने पैसा भी जमा कर दिया, उसके बाद भी आवंटन निरस्त करने की कार्रवाई की जा रही है।
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एलडीए का तर्क है कि जमीन पर कब्जा नहीं मिल पा रहा है, ऐसे में आवंटन निरस्त किया गया। एलडीए के रुख से लगता है कि वह जमीन लेने के लिए किसानों पर दबाव बनाने के बजाय आवंटियों से लड़ रहा है। आवंटियों ने कहा कि वह एक आशियाना की उम्मीद में जीवन की जमा पूंजी खपा कर बैंक के कर्जदार बन गए हैं, लेकिन एलडीए के अधिकारी उनकी स्थिति पर गौर नहीं कर रहे। कहा कि अब वह (आवंटी) संगठित हैं और इस मुद्दे पर आर-पार की लड़ाई के लिए तैयार हैंश्र चाहे यह लड़ाई सड़क पर लड़नी हो या न्यायालय में।
पुनर्विचार की आड़ में लटकाया जा रहा लामला
आवंटियों ने मंडलायुक्त से कहा कि पहले तो एलडीए गुपचुप आवंटन निरस्त कर दिए और जब इस कार्रवाई पर सवाल उठे तो आदेश को स्थगित कर पुनर्विचार की बात की जा रही है। सच यह है कि एलडीए इसकी आड़ में रजिस्ट्री और भौतिक कब्जा दिए जाने की कार्रवाई लटका रहा है, ताकि आवंटी मुद्दे से भटक जाए।
मंडलायुक्त ने दिया भरोसा
मंडलायुक्त रोशन जैकब ने आवंटियों को भरोसा दिया है कि सभी को उनके प्लाॅट मिलेंगे। उनकी एलडीए वीसी से बात हुई है। एलडीए को जमीन अधिग्रहण के लिए पुलिस बल उपलब्ध कराया जाएगा और सभी को प्लॉट की रजिस्ट्री करा कर उस पर कब्जा दिया जाएगा।