शिक्षा विभाग में निदेशक पद पाने को लेकर हायतौबा मची हुई है।
वैसे तो विभाग में निदेशक के कुल चार पद हैं, लेकिन विशेष परिस्थितियों में
शासन में विशेष सचिव पद पर निदेशक स्तर के अधिकारी को तैनाती दी जाती है।
शासन का यह पद बिना संवर्ग वाली (निसंवर्गीय) श्रेणी में आता है।
इसलिए
विभाग के अपर निदेशक स्तर के एक अधिकारी ने यह प्रत्यावेदन दिया है कि
निसंवर्गीय पद को भी जोड़ते हुए निदेशक के पांच पदों के लिए विभागीय
पदोन्नति कमेटी की बैठक बुलाई जानी चाहिए।
शिक्षा
विभाग में निदेशक स्तर के चार पद हैं। माध्यमिक शिक्षा, बेसिक शिक्षा,
राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) और साक्षरता एवं
वैकल्पिक शिक्षा निदेशक।
विभाग में मौजूदा समय निदेशक स्तर के तीन अधिकारी
हैं। वरिष्ठताक्रम में सर्वेंद्र विक्रम सिंह एससीईआरटी व अवध नरेश शर्मा
साक्षरता एवं वैकल्पिक शिक्षा के निदेशक हैं और अमरनाथ वर्मा शासन में
विशेष सचिव बेसिक शिक्षा के पद पर तैनात हैं।
बासुदेव यादव 31 मार्च को
निदेशक पद से रिटायर हो चुके हैं। उनके पास माध्यमिक व बेसिक शिक्षा निदेशक
का चार्ज था।
उनके जाने के बाद अपर निदेशक स्तर के अधिकारियों को इन दोनों
विभागों के कार्यवाहक निदेशक का कार्यभार दिया गया है।
शासन
स्तर पर तय किया गया है कि निदेशक स्तर के रिक्त हुए एक पद के लिए पहले
विभागीय पदोन्नति कमेटी (डीपीसी) की बैठक बुलाकर पदोन्नति की प्रक्रिया
पूरी कर ली जाए।
इसके बाद निदेशकों की तैनाती नए सिरे से की जाए। अपर
निदेशक में वरिष्ठताक्रम में डीबी शर्मा पहले और संजय सिन्हा दूसरे नंबर पर
हैं।
डीबी शर्मा सर्व शिक्षा अभियान के राज्य परियोजना निदेशालय में अपर
निदेशक हैं और संजय सिन्हा सचिव बेसिक शिक्षा परिषद हैं।
संजय सिन्हा ने
प्रमुख सचिव माध्यमिक शिक्षा को प्रत्यावेदन देते हुए शासन में विशेष सचिव
स्तर के पद को शामिल करते हुए निदेशक के पांच पदों के लिए डीपीसी कराने की
मांग की है।