सिपाही भर्ती 2015 के अनुसूचित जनजाति के अभ्यर्थी का रिकॉर्ड गायब होने के मामले में हाईकोर्ट ने पुलिस भर्ती बोर्ड से जानकारी मांगी है। कोर्ट ने इससे पूर्व भी बोर्ड
से मामले की जानकारी मांगी थी मगर पुलिस बोर्ड कोई जवाब नहीं दे सका। इसके बाद कोर्ट ने सख्त हिदायत देते हुए कहा है कि यदि 16 नवंबर तक इस मामले में जानकारी
उपलब्ध नहीं कराई जाती है तो सचिव पुलिस भर्ती बोर्ड सभी रिकार्ड के साथ स्वयं उपस्थित हों। नीरज कुमार गोंड की याचिका पर यह आदेश न्यायमूर्ति संगीता चंद्रा ने दिया है।
याची के अधिवक्ता सुनील यादव का कहना था कि याची ने 2015 की सिपाही भर्ती के एसटी कोटे में आवेदन किया था। परीक्षा के बाद उसे प्राप्त अंक एसटी वर्ग की कट ऑफ मेरिट
से अधिक थे। उसे 381.46 अंक मिले जबकि, कट ऑफ मेरिट 376.63 अंक थी। इसके बावजूद चयनित सूची में याची का नाम नहीं शामिल किया गया।
वेब साइट पर चेक करने पर पता चला कि उससे संबंधित सभी रिकॉर्ड गायब हैं। कोर्ट ने इस मामले में 28 सितंबर को ही जानकारी मांगी थी। लेकिन पुलिस भर्ती बोर्ड कोई जानकारी उपलब्ध नहीं करा सका। इस पर नाराजगी जताते हुए अदालत ने 16 नवंबर तक जानकारी उपलब्ध कराने या सचिव को व्यक्तिगत रूप से हाजिर होने का निर्देश दिया है।