जिन स्थितियों में जनता एक्सप्रेस हादसे का शिकार हुई, उनमें सीवीसी कपलर यात्रियों की जान बचा सकती थी। कुछ इसी तरह का हादसा जुलाई 2013 में निगोहां स्टेशन के पास हुआ था।
तब 100 किलोमीटर की गति से दौड़ रही हरिद्वार-इलाहाबाद एक्सप्रेस की दो बोगियां क्षतिग्रस्त होने के बावजूद एक-दूसरे पर नहीं चढ़ी थीं क्योंकि उनमें सीवीसी कपलर लगे हुए थे।
वहीं, जनता एक्सप्रेस की बोगियों के बीच साधारण पेंच वाले कपलर लगे हुए हैं।
यदि सीवीसी कपलर लगे होते तो जनरल बोगी के ऊपर स्लीपर क्लास की बोगी नहीं चढ़ सकती थी। डेड एंड ट्रैक के ठोकर को तोड़ते हुए जब इंजन और आगे की जनरल बोगी एक गड्ढे में उतरी तो स्लीपर क्लास की बोगी का कपलर टूट गया।
इसके बाद स्लीपर क्लास की बोगी ऊपर से ही जनरल बोगी को टक्कर मारते हुए उसे बुरी तरह पिचकाते हुए धंसती चली गई। आज भी जितनी नई ट्रेनों को चलाया जा रहा है, उनमें सीवीसी कपलर इस्तेमाल ही नहीं हो रहे हैं। कुल मिलाकर तकनीकी खामियों के कारण ये ट्रेन हादसा हुआ।