एक समय था कि शिक्षा विभाग में पढ़ाई लिखाई और इसके सुधार पर चर्चा होती थी, लेकिन आजकल यहां गायों की नस्ल पर चर्चा हो रही है।
चर्चा करने वाला अगर विभाग का मुखिया हो तो फिर क्या कहने। जी हुजूरी बजाने वालों की कमी नहीं है। सो विभाग के मुखिया जब भी शिविर कार्यालय में बैठते हैं तो ऐसे लोगों की संख्या काफी होती है, जो गायों की नस्ल पर चर्चा करते हुए दिखाई पड़ जाते हैं।
कुछ दिनों पहले की ही लें। एक अधिकारी विभागीय कार्य से मुखिया के पास गया हुआ था। मामला कोर्ट से जुड़ा हुआ था, सो उनसे चर्चा जरूरी थी।
अधिकारी फाइल लेकर मुखिया के सामने बैठा रहा, लेकिन चाटुकार लोग केवल गायों की नस्ल और उनके नामों पर चर्चा करते रहे। मुखिया भी गायों और उनकी नस्ल पर चर्चा में इतने मशगूल हो गए कि उन्हें उस अधिकारी के बैठे रहने का ध्यान ही नहीं रहा।
अधिकारी काफी देर तक बैठे-बैठे अपनी बारी का इंतजार करता रहा, लेकिन मुखिया महोदय चर्चा के दौरान अचानक उठे और कहीं निकल गए। शिक्षा विभाग में आजकल गायों की नसल की चर्चा हर किसी के जुबान से सुनी जा सकती है।