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यूपी में अभी लागू नहीं हो पाएगा रियल स्टेट बिल, जानिए वजह?

Mon, 01 May 2017 03:07 PM IST
सुधीर कुमार सिंह/अमर उजाला, लखनऊ
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डेमो प‌िक - फोटो : Reuters
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बिल्डरों पर लगाम कसने और जनता को हितों की सुरक्षा को ध्यान में रखकर केन्द्र सरकार द्वारा तैयार गया ‘रीयल एस्टेट रेगुलेटरी एक्ट’ 1 मई से पूरे देश में भले ही लागू किया जा रहा है, लेकिन यूपी में इसका क्रियान्वयन फिलहाल लटक गया है। 
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वजह यह है कि इस एक्ट को क्रियान्वित करने के लिए राज्य स्तर पर ‘रीयल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी’ (रेरा) का गठन ही नहीं हो पाया है। हालांकि अखिलेश सरकार ने रेरा के गठन की प्रक्रिया जरूर शुरू की थी, लेकिन नई सरकार के आते ही इसे रद कर दिया गया है। 

अब नये सिरे से रेरा के गठन की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। इसलिए संभावना है कि सूबे की जनता को इस एक्ट का लाभ जून के बाद ही मिल पाएगा।

दरअसल, बिल्डरों की मनमानी पर लगाम लगाने के उद्देश्य से केन्द्रीय शहरी विकास मंत्रालय द्वारा तैयार किए गए एक्ट को सभी प्रदेशों में 1 मई से प्रभावी किया जा रहा है। इस एक्ट में प्रावधान किया गया है कि इस एक्ट को क्रियान्वित करने के लिए सभी राज्य इस एक्ट को मंजूरी देने के साथ ही अपने-अपने स्तर पर एक ‘भू-संपदा नियमन प्राधिकरण’ (रीयल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी) और विवादों के निपटारे केलिए ‘रीयल एस्टेट ट्रिब्यूनल’ का गठन करेंगे। 
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जिसका अध्यक्ष रिटायर मुख्य सचिव स्तर का कोई आईएएस अधिकारी होगा। इसके अलावा प्रमुख सचिव स्तर के तीन सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी इस अथॉरिटी के सदस्य होंगे।

अधिकारियों में थे कई विवादित नाम

डेमो प‌िक - फोटो : Reuters
इस आधार पर अखिलेश सरकार ने कैबिनेट के जरिए अक्तूबर में ही ‘द उत्तर प्रदेश रीयल एस्टेट (रेग्युलेशन एंड डेवलपमेंट) रूल्स-2016 को मंजूरी दे दी और इसके क्रियान्वय केलिए रीयल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी केगठन की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई थी। 
इसके तहत अध्यक्ष पद के लिए सूबे केपूर्व मुख्य सचिव आलोक रंजन समेत 15 और सदस्य पद केलिए 37 वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों ने अपना आवेदन भी आवास विभाग के पास जमा कर दिया था। 

आवेदन करने वाले कई अधिकारी ऐसे भी थे, जो अगले एक-दो महीने के भीतर रिटायर होने वाले थे। आवेदन देने वाले अधिकारियों में कई विवादित नाम भी थे।

आवेदकों के चयन के लिए गठित तीन सदस्यीय समिति के मुखिया हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने कई आवेदनों पर सवाल खड़ा कर दिया था। लिहाजा अथॉरिटी के गठन की प्रक्रिया सुस्त पड़ गई। इसी बीच विधानसभा चुनाव के लिए सूबे में आदर्श आचार संहिता लागू होने से भी गठन का मामला ठंडे बस्ते में चला गया था।
 
लिहाजा इसकेलिए सबसे जरूरी रेरा का अपना ‘वेबसाइट’ भी अब तक नहीं बन सका है। सूबे में नई सरकार गठन के बाद अखिलेश सरकार में रेरा केगठन को लेकर की गई सारी कार्रवाई को रद्द कर दिया गया है। साथ ही नये सिरे से प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।

उच्च पदस्थ सूत्र का कहना है कि यूपी में रेरा के गठन के लिए फिर से प्रक्रिया शुरू करने से संबंधित पत्रावली सीएम कार्यालय को भेज दी गई है। संभावना है कि एक-दो दिन में पत्रवाली वापस आवास विभाग में आ जाएगी। 

इसकेबाद रेरा के अध्यक्ष व सदस्य पर नियुक्ति के लिए फिर से आवेदन मांगने से संबंधित विज्ञापन प्रकाशित किया जाएगा। हालांकि पिछली बार जमा आवेदन भी मान्य होंगे। इस प्रक्रिया के पूरा होने में करीब दो महीने का समय लगने की संभावना है। इसलिए अब यूपी की जनता को इस एक्ट का लाभ जून के बाद ही मिलने की संभावना है।
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अवैध प्रोजेक्ट्स की हो सकेगी छंटनी

डेमो प‌िक - फोटो : Reuters
बिल्डर्स का मानना है कि नए बिल से मौजूदा समय में काम कर रहे डेवलपर्स और उनके प्रोजेक्ट की छंटनी तय है। इससे केवल वैध बिल्डर्स ही मार्केट में ठहर पाएंगे। रीयल एस्टेट के मार्केट की साख को धक्का लगा रहे बिल्डर्स सख्त कानून के आगे टिक ही नहीं पाएंगे। इससे ग्राहक दुबारा से रीयल एस्टेट की तरफ लौटेगा। उम्मीद है कि इससे आने वाले समय में मंदी भी खत्म हो सकेगी।

एलडीए, आवास विकास भी दायरे में
नए बिल के दायरे में निजी डेवलपर्स के साथ एलडीए और आवास विकास भी दायरे में आएंगे। इससे एलडीए और आवास विकास को भी निजी डेवलपर्स के साथ वादे के अनुसार समय पर फ्लैट या मकान पर कब्जा देना होगा। रीयल एस्टेट में मंदी के पीछे प्रोजेक्ट में आ रही देरी भी एक बड़ा कारण बनी है।

इन नियमों से बिल्डरों पर कसेगी लगाम
- रीयल एस्टेट रेग्युलेटरी अथॉरिटी की रहेगी प्रोजेक्टों पर नजर
- रीयल एस्टेट ट्रिब्यूनल में होगी विवादों की सुनवाई
- प्रोजेक्ट लांच करने से पहले बिल्डरों का पंजीकरण अनिवार्य
- बिल्डरों को पूर्व के सभी प्रोजेक्ट की भी सूचना देनी होगी
- प्रोजेक्ट में हेराफेरी पर प्रमोटर को तीन साल तक की जेल
- बिल्डर्स अपने आवंटियों से वादाखिलाफी नहीं कर पाएंगे
- रीयल एस्टेट एजेंट का भी रजिस्ट्रेशन अनिवार्य
- बिल्डर्स और उसके प्रोजेक्ट की सूचनाएं अथॉरिटी की वेबसाइट पर रहेगी
- 45 दिन केअंदर बिल्डर्स को आवंटी को रिफंड मय तयशुदा ब्याज के करना होगा
- ट्रिब्यूनल को अधिकार होगा कि बाहरी विशेषज्ञों से विवाद की जांच कराए
- किसी भी आवंटी को सीधे अथॉरिटी में शिकायत करने की अनुमति होगी
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