दोस्तों ने समझाया, लेकिन मजाज की शराब बढ़ती गई। मजाज के दोस्त और प्रसिद्ध साहित्यकार सरदार जाफरी ने लिखा है, ‘बात 1952 की है। मजाज रोज शाम को शराब पीने लगा था। प्रतिदिन वह शाम को मुझसे पांच रुपये मांगता।
एक दिन उसने 10 रुपये मांगें। मैंने समझाने की कोशिश की तो बोला, ‘सरदार, तुम्हारे बीवी-बच्चे हैं, घर है, शायरी करते हो, मेरे पास क्या है? अब शराब भी नहीं पीने देते।’