योगी सरकार की ओर से मैरिज रजिस्ट्रेशन अनिवार्य किए जाने पर ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने ऐतराज जताया है। हालांकि बोर्ड ने साफ किया कि वह रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया के खिलाफ नहीं है।
पर्सनल लॉ बोर्ड के कार्यकारिणी सदस्य व ईदगाह के इमाम मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली ने कहा कि मुस्लिम समुदाय में निकाहनामा में दूल्हा और दुल्हन का पूरा ब्योरा रहता है।
इसके अलावा मुस्लिमों की शादी का पंजीकरण दारुलकजा और इस्लामिक सेंटरों में किया जाता है। इस लिहाज से दारुलकजा और इस्लामिक सेंटरों के पंजीकरण को ही वैध माना जाना चाहिए।
उन्होंने साफ किया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड मैरिज रजिस्ट्रेशन के खिलाफ नहीं है, लेकिन पंजीकरण को अनिवार्य करने पर बोर्ड को आपत्ति है। उन्होंने सवाल उठाया कि धार्मिक रीति-रिवाज के आधार पर किया गया कोई भी विवाह सिर्फ पंजीकरण न कराने पर अवैध कैसे घोषित किया जा सकता है?
मौलाना ने राज्य सरकार से एक कमेटी बनाने की मांग करते हुए कहा कि कमेटी में सभी धर्मगुरुओं को शामिल कर उनके सुझाव लिए जाएं। धर्मगुरुओं के सुझाव के बाद ही सरकार को विवाह पंजीकरण से संबंधित ड्राफ्ट तैयार करना चाहिए।