रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने होम लोन के लिए डाउन पेमेंट की स्कीम को खत्म कर के आशियाना पाने की चाहत रखने वालों को खासी राहत बख्शी है।
यह बात दीगर है कि, रीयल इस्टेट से कारोबारियों के लिए यह बहुत अच्छी खबर नहीं है।
मगर बिल्डिंग निर्माण शुरू होने के बाद थोड़ा थोड़ा होम लोन जारी करने के नियम से कंपनियों और सरकारी एजेंसियों की यह मजबूरी होगी कि वे स्कीम लांचिंग के साथ ही इमारत का निर्माण भी शुरू कर दें।
ऐसे में राजधानी की दर्जनों निजी और सरकारी हाउसिंग स्कीम पर सीधा असर पड़ेगा। खासतौर पर आवास विकास परिषद ने हजारों की संख्या में फ्लैटों की स्कीम लांच की है, उनके लिए आवंटियों को होम लोन तभी मिल सकेगा, जब बिल्डिंगों का निर्माण शुरू कर दिया जाएगा।
आवंटियों के साथ होने वाला धोखा अब कम होगा। ऐसा अनेक बार हो चुका है जबकि, आवासों का निर्माण शुरू हुए बिना रुपया जमा हो गया और बाद में आवंटियों को तकलीफों का सामना करना पड़ा। भविष्य में ऐसा होने की संभावना अब खासी कम हो गई है।
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने बीते रोज होम लोन देने वाली बैंकों के लिए गाइडलाइन जारी की। इसके मुताबिक, अब बिना हाउसिंग प्रोजेक्ट में निर्माण शुरू हुए गृहऋण नहीं दिया जाएगा।
इससे बिल्डर ग्राहक से जो डाउन पेमेंट लेते हैं, वह व्यवस्था खत्म होगी। इसके साथ ही आवंटी या बैंक से लिया हुआ धन बिल्डर किसी अन्य प्रोजेक्ट में लगाएगा यह भी संभावना खत्म हो जाएगी।
अनेक प्रोजेक्ट हवा में
बड़ी से बड़ी रीयल इस्टेट कंपनी हो या फिर एलडीए और आवास विकास परिषद सभी के ज्यादातर प्रोजेक्ट जब लांच किए जाते हैं तो वे हवा में ही होते हैं।
प्राधिकरण की करीब आधा दर्जन हाउसिंग स्कीम आवंटन और पंजीकरण के बाद खत्म कर दी गईं। जबकि, निजी कंपनियों की बात करें तो पार्श्वनाथ ने पिछले छह साल से अपने आवंटियों को कब्जा नहीं दिया है।
इसी तरह से एपीआई अंसल की आस्था अपार्टमेंट स्कीम भी कानूनी पचड़े में फंसने से आवंटियों के लिए निराशाजनक साबित हुई।
जबकि, आज की तारीख में जो भी प्रोजेक्ट लांच किए जा रहे हैं, उनमें निर्माण बाद में शुरू होता है और रुपया पहले जमा करा लिया जाता है। ऐसे हालात में हर प्रोजेक्ट में लोगों का रुपया फंसने की आशंका बनी रहती है।
बिल्डरों में रुपया डाइवर्ट करने का ट्रेंड
बिल्डरों में रुपया डाइवर्ट करने का ट्रेंड है। वे जिस प्रोजेक्ट के लिए आवंटियों या बैंक से रुपया लेते हैं, उसका उपयोग अपने अन्य प्रोजेक्ट पर करने लगते हैं।
माना जा रहा है कि, इस तरह का गलत काम करने वाले बिल्डरों पर इस नए नियम का असर पड़ेगा और वे मार्केट से गायब हो जाएंगे। जो बिल्डर वास्तविकता में काम करना चाहते हैं उनके लिए रिजर्व बैंक की गाइडलाइन अच्छी है।
जो काम करना चाहते हैं उन पर फर्क नहीं
बिल्डर खालिद मसूद बताते हैं कि, कांस्ट्रक्शन लिंक होम लोन रीयल इस्टेट मार्केट पर थोड़ा नकारात्मक मगर अधिक सकारात्मक फर्क पड़ेगा। फाइनेंस में टाइटनेस आ सकती है।
मगर जो प्रोजेक्ट का रुपया डाइवर्ट नहीं करते हैं उन पर कोई असर नहीं पडेगा। जनता को सबसे अधिक लाभ होगा। एक अन्य बिल्डर अरशद बताते हैं कि, जनता को बहुत फायदा होगा। उनको अब रुपया देने के साथ अपना मकान बनते हुए दिखेगा। आरबीआई की यह अच्छी पहल है।
एलडीए अब निर्माण के बाद ही करेगा पंजीकरण
प्राधिकरण अब निर्माण के बाद ही पंजीकरण करेगा। पूर्व में अनेक परियोजनाओं के विवादों के चलते बंद होने के चलते अब इस व्यवस्था को बदला जा रहा है।
उपाध्यक्ष अष्टभुजा प्रसाद तिवारी बताते हैं कि, भविष्य में टेंडर कर के पहले निर्माण शुरू करवाया जाएगा और उसके बाद ही आवंटन करेंगे।