राजधानी में टमाटर के बाद अब प्याज के दाम में भी आग लग गई है। प्याज के चढ़ते दाम ने फिलहाल इसे आम आदमी की थाली से दूर कर दिया है।
70 रुपया प्रति किलो तक पहुंचे प्याज की कीमत ने पहले से ही महंगाई से जूझ रहे लोगों के घर का बजट और बिगाड़ दिया है।
स्थिति यहां तक पहुंच गई है कि मध्य वर्ग के लोग दुकानों पर बस प्याज की कीमत पूछ कर निकल ले रहे हैं।
विशेषज्ञ प्याज की आसमान छूती कीमतों के लिए जहां मांग और आपूर्ति के बीच पैदा हुए व्यापक अंतर को कारण बता रहे हैं वहीं आम आदमी इन सबसे दूर सिर्फ सरकार की अदूरदर्शी नीति को कोस रहा है।
दूसरी ओर जिला प्रशासन के अधिकारियों ने मंगलवार को दुबग्गा एवं नवीन मंडी का जायजा लिया लेकिन उन्हें कहीं भी प्याज का अतिरिक्त भंडारण नहीं मिला।
इंदिरानगर निवासी नीलम बताती कि पहले टमाटर ने रुलाया अब प्याज ने परेशान कर दिया है। समझ में नहीं आता कि प्याज खरीदे कि बाकी कि सब्जी।
टमाटर व प्याज को छोड़कर बाकी सारी सब्जी सस्ती हो चुकी। लेकिन अकेले प्याज के दाम ने सब्जी खरीदने का बजट बिगाड़ दिया है।
70 रुपये किलो का प्याज खरीदना सबके बस का काम नहीं है। इसके चलते खाने की थाली से अब प्याज से खाली ही है।
महानगर निवासी कमलेश बताते कि पहले एक किलो प्याज खरीदते थे लेकिन अब तो 200-250 ग्राम खरीदकर ही काम चलाना पड़ रहा है।
यहीं नहीं अधिकतर खरीददार तो प्याज का दाम पूछकर ही चलते बनते हैं। कारोबारी पवन के मुताबिक अब तो रेस्टोरेंट में छोले-भटूरे भी बिना प्याज के ही बिक रहे हैं, जबकि प्याज के लच्छे बिना छोले-भटूरे का स्वाद ही नहीं मिलता।
प्याज की आवक घटी
दुबग्गा के थोक कारोबारी अतीक के अनुसार मध्य प्रदेश से आने वाले प्याज की आवक थम गई है। अब तो सिर्फ नासिक की लासल एवं पीपल मंडी से ही प्याज आ रहा है।
आवक कम होने के कारण ही इसके दाम बढ़े हैं। जिनके पास प्याज का पुराना स्टाक है वह मनमाने दाम पर बेच का मुनाफा कमा रहे हैं।
मंगलवार को नासिक के थोक कारोबारी सुरेश ने बताया कि लासल एवं पीपल मंडी में प्याज 40 से 45 रुपये किलो बिक रहा है। लखनऊ पहुंचते उसकी कीमत 44 से 49 रुपये तक हो जाती है।