लखनऊ में कोरोना पॉजिटिव मरीज मिलने की दर अब 21.76 फीसदी तक पहुंच गई है। आलम ये है कि जुलाई में अब तक हर पांच दिन में पॉजिटिव केस का आंकड़ा 6.77 फीसदी बढ़ा है। इससे स्वास्थ्य विभाग भी अब हाथ खड़े करने की स्थिति में पहुंच रहा है।
राजधानी में पहली बार 11 मार्च को पॉजिटिव मरीज मिला। तब से 17 मई के बीच यानी 67 दिनों में पॉजिटिव मरीजों का आंकड़ा 308 तक पहुंचा था, लेकिन गुरुवार को एक ही दिन में इतने मरीजों के मिले। इससे हताश स्वास्थ्य विभाग के अफसर भी अब इशारा करने लगे हैं कि मामला हाथ से निकलता जा रहा है। वह दोगुनी मेहनत करके भी स्थिति नियंत्रित नहीं कर पा रहे हैं।
आंकड़े बताते हैं खतरा किस तेजी से बढ़ रहा
पिछले 15 दिनों में ही 13.82 फीसदी की बढ़ोतरी: स्वास्थ्य विभाग से जारी आंकड़ों के मुताबिक एक से पांच जुलाई के बीच कुल 2947 सैंपल लिए गए, जिसमें 234 यानी 7.94 फीसदी पॉजिटिव मिले। इसी तरह 6 से 10 जुलाई के बीच 4157 सैंपल लिए गए, जिसमें 620 यानी 14.91 फीसदी लोग पॉजिटिव मिले। इसी तरह 11 से 15 जुलाई के बीच लिए गए 5407 सैंपल में 1177 यानी 21.76 फीसदी लोग कोरोना पीड़ित मिले हैं। इस तरह जुलाई में सिर्फ 15 दिनाें में ही पॉजिटिव केस का ग्राफ 13.82 फीसदी बढ़ गया है।
मई से जून के बीच 3.82 फीसदी की बढ़ोतरी
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक 1 से 15 मई के बीच कुल लिए गए सैंपल में पॉजिटिव मरीजों के मिलने की दर 2.88 फीसदी थी। 16 से 31 मई के बीच यह आंकड़ा 4.89 फीसदी, 1 से 15 जून के बीच 5.46 फीसदी और 16 से 30 जून के बीच 6.70 फीसदी रहा। इस तरह मई से जून तक 3.82 फीसदी की बढ़ोतरी हुई।
हमें इसलिए भी फिक्र करने की जरूरत है
हम लगातार टीमें बढ़ा रहे...पर लोगों की लापरवाही से स्थिति बिगड़ती जा रही
संक्रामक रोग नियंत्रण प्रभारी डॉ. केपी त्रिपाठी का कहना है कि पहले की अपेक्षा लगातार टीमें बढ़ा रहे हैं। लोगों को जागरूक करने के साथ हिदायत भी दे रहे हैं, लेकिन लोगों के मास्क लगाने और सोशल डिस्टेंसिंग में लापरवाही बरतने से स्थिति बिगड़ती जा रही है। हालांकि, वह मरीजों का ग्राफ बढ़ने की एक बड़ी वजह सैंपल लेने की संख्या बढ़ने को बता रहे हैं, लेकिन यदि हम अब तक लिए सैंपल व पॉजिटिव मिले मरीजों की स्थिति का मूल्यांकन करें तो यह बात पूरी तरह फिट नहीं बैठ रही है।
लक्षणों के न दिखने से बढ़ी चुनौती
ज्यादा से ज्यादा मरीजों का सैंपल लिया जा रहा है। लॉकडाउन खुलने से लोग एक जगह से दूसरे जगह जा रहे हैं। इससे भी काफी असर पड़ा है। ज्यादातर लोगों में कोरोना के लक्षण नहीं दिख रहे हैं, इस वजह से भी वायरस का प्रसार हो रहा है। स्वास्थ्य विभाग की टीम अन्य विभागों की टीम के साथ मिलकर लगातार लोगों के इलाज में लगी है। - डॉ. विक्रम सिंह, स्टेट नोडल अधिकारी कोरोना
हाई रिस्क वाले लोगों को रहना होगा सावधान
वायरस तेजी से फैल रहा है। यह धीरे-धीरे 80 फीसदी लोगों तक पहुंच जाएगा तभी इसका प्रसार रुकेगा। यह सामान्य लोगों के लिए खतरनाक नहीं है, लेकिन हाई रिस्क वालों को सावधान रहना होगा। इससे बचने का सबसे उपयुक्त साधन मास्क है। घर से मास्क लगाकर ही निकलें। जहां तक मौत का सवाल है तो जिन लोगों में किसी भी तरह का पहले से संक्रमण होगा, उनमें वायरस अधिक प्रभाव डालेगा। लंग फेल्योर, किडनी फेल्योर जैसे केस सामने आएंगे। ऐसे ही मामलों में मौत होगी। पहले भी ऐसे मामलों में मौतें होती रही हैं। - डॉ. टी एन ढोल, पूर्व विभागाध्यक्ष माइक्रोबायोलॉजी विभाग, एसजीपीजीआई।