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Lucknow News: रणजी ट्रॉफी... चार साल से पूल में अटकी यूपी की टीम

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लखनऊ। चार साल से रणजी ट्रॉफी के पूल में अटकी उत्तर प्रदेश की टीम के सामने इस बार भी राह आसान नहीं है। 2021-22 में सेमीफाइनल तक पहुंचने वाली यूपी की टीम इसके बाद लगातार चार सत्र 2025-26, 2024-25, 2023-24 और 2022-23 में पूल चरण से ही बाहर हो गई। वनडे और टी-20 में असर छोड़ने वाली टीम प्रथम श्रेणी क्रिकेट में उस लय को कायम नहीं रख सकी। अब 11 अक्तूबर से बिहार के खिलाफ शुरू होने वाले नए अभियान में टीम के सामने सबसे बड़ी चुनौती पूल की बाधा पार करने की होगी।
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रणजी ट्रॉफी के एलीट पूल-ए में यूपी का सामना गत विजेता जम्मू-कश्मीर, वडोदरा, गोवा, मध्य प्रदेश, पुडुचेरी और मजबूत विदर्भ से होगा। पूल में शीर्ष दो स्थान हासिल करने वाली टीमें ही क्वार्टर फाइनल में जगह बनाएंगी। ऐसे में यूपी को चार साल के इंतजार को खत्म करने के लिए शुरुआत से ही लगातार बेहतर प्रदर्शन करना होगा।
कप्तान का फैसला बाकी, छह-सात को चयन :
टीम के कप्तान का नाम अभी घोषित नहीं हुआ है। पिछले सत्र में करन शर्मा और आर्यन जुयाल ने टीम की कमान संभाली थी। यूपीसीए से मिली जानकारी के मुताबिक कप्तानी में बदलाव की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है। यूपीसीए के सीईओ अंकित चटर्जी ने बताया कि कानपुर के ग्रीनपार्क स्टेडियम में शुक्रवार से यूपी रणजी टीम का शिविर शुरू होगा। इसके लिए 25 खिलाड़ियों को सूचित किया गया है और उन्हें शुक्रवार को रिपोर्ट करने के लिए कहा गया है। आठ अक्तूबर तक चलने वाले शिविर में 16 सदस्यीय टीम और कप्तान का चयन छह या सात अक्तूबर को किया जाएगा। नौ अक्तूबर को टीम राजगीर (बिहार) के लिए रवाना होगी।
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ज्ञानेंद्र पांडेय की वापसी बदलेगी रणजी की तस्वीर
यूपी रणजी टीम की कमान इस बार पूर्व अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर और सफल कोच ज्ञानेंद्र पांडेय के हाथों में होगी। यूपीसीए ने उनके नाम की पुष्टि कर दी है। ज्ञानेंद्र की कोचिंग में यूपी की टीम 2007-08 और 2008-09 में रणजी ट्रॉफी के फाइनल तक पहुंची थी। इसके अलावा उनकी कोचिंग में यूपी ने 2020-21 में विजय हजारे ट्रॉफी में उपविजेता बनने का गौरव हासिल किया था। बतौर खिलाड़ी ज्ञानेंद्र पांडेय ने यूपी के लिए 117 प्रथम श्रेणी मैच खेले। उन्होंने 36.38 की औसत से 5348 रन बनाए और 165 विकेट हासिल किए। अब उनकी वापसी ऐसे समय हुई है, जब टीम लगातार चार सत्र से रणजी के पूल चरण से आगे नहीं बढ़ सकी है।
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