लखनऊ। बरेली से लखनऊ तक 250 किमी का सफर तय कर गंभीर हालत में लाए गए मरीज को सरकारी संस्थानों में इलाज नहीं मिला। परिजन उसे लेकर एक से दूसरे संस्थान भटकते रहे। इस दौरान मरीज की हालत एंबुलेंस में बिगड़ गई और उसकी मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि संस्थानों में कई घंटे इंतजार बाद भी बेड खाली न होने का हवाला देकर वापस किया जाता रहा।
शाहजहांपुर के जंगबहादुरगंज का रहने वाला अंकुर (25) सड़क हादसे में बुधवार को जख्मी हो गया था। परिजन पहले उसे निजी अस्पताल ले गए। वहां हालत गंभीर होने पर डॉक्टरों ने बृहस्पतिवार सुबह बरेली के सरकारी अस्पताल रेफर किया। वहां से मरीज को बेहतर इलाज के लिए हायर सेंटर रेफर किया गया। परिजन निजी एडवांस लाइफ सपोर्ट वाली एंबुलेंस में लेकर उसे पहले केजीएमयू आए। वहां करीब आधे घंटे तक मरीज एंबुलेंस में ही पड़ा रहा। फिर डॉक्टरों ने वेंटीलेटर खाली न होने की बात कहकर लोहिया रेफर किया।
लोहिया में इंतजार बाद भी बेड नहीं मिला। वहां से मरीज को बलरामपुर अस्पताल भेजा गया। दोपहर डेढ़ बजे परिजन मरीज को लेकर बलरामपुर अस्पताल की इमरजेंसी पहुंचे। वहां जूनियर डॉक्टरों ने इमरजेंसी मेडिकल अफसर को मरीज की केस हिस्ट्री बताई। इमरजेंसी मेडिकल अफसर ने एंबुलेंस में पहुंचकर जांच की और अंकुर को मृत घोषित कर दिया। परिजन बिना पोस्टमार्टम कराए शव लेकर वापस चले गए। मां रामकली का आरोप है लखनऊ के कई अस्पताल ले गए, मगर बेड खाली न होने की बात कहकर वापस कर दिया गया।