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पुजारी ने लगाया रामलला की उपेक्षा का आरोप, बताया- नहीं रखा जाता सोने-चांदी के चढ़ावे का हिसाब

Sun, 06 May 2018 11:33 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, फैजाबाद
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पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास - फोटो : amar ujala
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करोड़ों भक्तों की आस्था व श्रद्धा के केंद्र अधिगृहित परिसर में विराजमान रामलला की उपेक्षा एक बार फिर चर्चा में है। कहने को तो रामलला के खाते में करोड़ों जमा हैं लेकिन व्यय के लिए पाई-पाई की मोहताजी है। यह स्थिति तब है जब रामलला के दरबार में प्रतिमाह 6 से 7 लाख रुपये का चढ़ावा आता है। उत्सवों में यह चढ़ावा और अधिक हो जाता है। रामजन्मभूमि के मुख्य पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास ने रामलला के उत्सव समैया में उपेक्षा बरतने का आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र भेजा है।

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श्रीरामजन्मभूमि के पुजारी का आरोप है कि जन्मोत्सव में 51 हजार रुपये का व्यय आया लेकिन रिसीवर के स्तर से मात्र 42 हजार रुपये ही स्वीकृत किए गए हैं, बाकी नौ हजार अभी तक नहीं मिले हैं। कहा कि होली, विजयदशमी और दीपावली जैसे प्रमुख पर्व के लिए तो रामलला के नाम से कोई बजट ही नहीं दिया जाता है। जबकि रामलला के प्रति वर्ष 75 लाख से एक करोड़ रुपये का चढ़ावा मात्र बैंक की शोभा बढ़ाने तक रह गया है।

रामलला की पूजा-अर्चना एवं उत्सव समैया में व्यय के लिए पाई-पाई की मोहताजी रहती है। बताया कि गत वर्ष भी रामलला के जन्मोत्सव में 46 हजार व्यय के मुकाबले मात्र 38 हजार की राशि ही स्वीकृति हुई थी। कहा कि हमने मंडलायुक्त/रिसीवर को खर्च का ब्योरा बनाकर भेजा था, लेकिन व्यय के मुकाबले 9 हजार कम राशि स्वीकृति की गई। कहा कि हमने मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर उत्सव समैया के प्रति बरती जा रही उपेक्षा की ओर ध्यान आकृष्ट कराया है।

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आय-व्यय का नहीं रखा जाता ब्योरा

file foto - फोटो : amar ujala
रामजन्मभूमि के पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास का यह भी आरोप है कि रामलला के सालाना आय-व्यय का कोई ब्योरा नहीं रखा जाता है। दान पात्र में श्रद्धालु, भक्त सोने, चांदी व नगदी चढ़ाते हैं लेकिन उसका भी कोई ब्योरा नहीं रहता है। बताया कि 1998 से 2002 तक आय-व्यय का ब्योरा रखा जाता था लेकिन उसके बाद का लेखा-जोखा उनके पास नहीं है। इस विषय में पूछने पर जिम्मेदार कुछ भी कहने से कतराते हैं।

कहा कि साल में जो आय व्यय होता है उसको सार्वजनिक किया जाना चाहिए। रामलला के दान-पात्र में सोने चांदी के जो सामान चढ़ता हैं, वह कहां जाते हैं इसका पता लगना चाहिए। वह भगवान की संपत्ति है, इसका दुरुपयोग नहीं होना चाहिए।

पुजारी के आरोप सरासर गलत
मामले पर मंडलायुक्त/रिसीवर मनोज मिश्र का आरोप है कि दानपात्र की निगरानी 24 घंटे सीसीटीवी कैमरे से की जाती है। चार लोगों की एक कमेटी है, जिसकी निगरानी में दानपात्र खोला जाता है। जो नकद चढ़ावा आता उसे रामलला के खाते में जमा कराया जाता है। इसके अतिरिक्त अन्य चढ़ावा या सामान ट्रेजरी के लॉक में रखा जाता है। पूरी पारदर्शिता के साथ सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशन में रामलला परिसर की समस्त व्यवस्थाएं संचालित है। इसमें पुजारी का रोल सिर्फ पूजा-पाठ करना है। उनकी ओर से दिए गए बिल पर पिछले साल के स्वीकृत खर्च के अनुपात में बढ़ी महंगाई को देखते हुए इस साल बढ़ाकर स्वीकृति दी गई है। पुजारी का आरोप सरासर गलत है।
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