जब व्यक्ति भक्ति के मार्ग पर आगे बढ़ता है तो सबसे पहले काल और माया उसके
मार्ग में अवरोध उत्पन्न करता है।
काल और माया से बचाने की ताकत सिर्फ
सच्चे संत में ही होती है।
ये उद्गार केशवनगर के नागेश्वर महादेव मंदिर में
चल रहे सत्संग के तीसरे दिन शनिवार को कथा व्यास स्वामी सिरजनहार दयालदास
महाराज ने बखाने।
उन्होंने कहा कि सच्चे प्रेम को पाने के लिए मानव को मान
का त्याग करना ही पड़ता है।
उधर, श्री रामचरित मानस जन कल्याण समिति आलमबाग
की ओर से चल रही रघुनाथ कथा में कथा व्यास सरोजदास शास्त्री ने अंतिम दिन
रामकथा बखानी। रविवार को हवन के बाद महाप्रसाद बंटेगा।