निशंक यहां अपनी बेटी श्रेयसी की सेना में कमीशंड आफिसर के रूप में ट्रेनिंग पूरी होने के उपलक्ष्य में आयोजित समारोह में शामिल होने आए थे। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में औसतन हर परिवार से एक व्यक्ति सेना में शामिल होकर देश की सेवा कर रहा है।
आमतौर पर कहा जाता है कि राजनीतिज्ञ अपने परिवार के सदस्यों को सेना में नहीं भेजते। उनकी बेटी एमबीबीएस करने के बाद मॉरीशस में मल्टीनेशनल कंपनी में काम कर रही थी। उसने उत्तराखंड की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए सेना में जाने का विकल्प चुना।