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सुंदरता व मजबूती की मिसाल होगा राममंदिर, सीमेंट पर रिसर्च कर रहे आईआईटी चेन्नई के वैज्ञानिक

Thu, 03 Sep 2020 09:16 PM IST
पंकज श्रीवास्‍तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अयोध्या

सार

श्रीराम जन्मभूमि ट्रस्ट क्षेत्र के सचिव बोले, सभी जांच रिपोर्ट आने के बाद शुरू होगा निर्माण, राबर्ट्सगंज और बुंदेलखंड की 800 किलो गिट्टी व बेतवा व केन नदी की 10 क्विंटल मोरंग भेजेंगे चेन्नई, सीमेंट पर रिसर्च कर रहे आईआईटी चेन्नई के वैज्ञानिक
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जानकारी देते हुए चंपत राय - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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भगवान राम के बनने वाले भव्य मंदिर सुंदरता व मजबूती की मिसाल होगा। आईआईटी चेन्नई के वैज्ञानिक गिट्टी, मोरंग व सीमेंट को लेकर शोध करेंगे ताकि मंदिर एक हजार वर्ष से भी ज्यादा समय तक अक्षुण रहे। अभी मंदिर निर्माण के लिए मिट्टी की सैंपलिंग समेत विभिन्न रिपोर्टों का आना शेष है। समस्त रिपोर्ट आने के बाद ही निर्माण शुरू होगा। ये बातें श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के सचिव चंपत राय ने अयोध्या विकास प्राधिकरण से मानचित्र लेने के बाद कही है।
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उन्होंने बताया है कि मंदिर निर्माण का एक-एक कार्य कानूनी प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ रहा है। नक्शा पास हो जाने के बाद अब प्राथमिक स्तर के काम पूरे हो गए हैं। उन्होंने बताया है कि जिस निर्धारित स्थान पर मंदिर बनना है, वहां की 60 मीटर की गहराई तक के सैंपल लिए गए हैं। सैंपलिंग का काम आईआईटी चेन्नई कर रहा है। दूसरा कार्य भूकंपरोधी भवन का है। इसके लिए भी सैंपल सेंट्रल बिल्डिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट, रुड़की कर रहा है। इन दोनों संस्थाओं को अभी रिपोर्ट देना है।

इसी रिपोर्ट के आधार पर नींव का डिजाइन किया गया है। बताया कि जितने हिस्से में मंदिर बनेगा, वहां 1200 स्थानों पर 35 मीटर गहराई की पैलिंग होगी। इसमें मोरंग, गिट्टी व सीमेंट भरी जाएगी। इसमें कौन सी गिट्टी, मोरंग व सीमेंट का प्रयोग होना है, इसका निर्धारण भी आईआईटी चेन्नई को करना है। बताया है कि गिट्टी के लिए राबर्ट्सगंज और बुंदेलखंड की 800 किलो गिट्टी भेजी जानी है। इसके साथ ही बेतवा व केन नदी का मोरंग 10 क्विंटल भेजा जाएगा।
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इसके अलावा सीमेंट पर भी रिसर्च चल रहा है। वह बताते हैं कि बाजार में मिलने वाली सीमेंट का प्रयोग नहीं किया जाएगा। आईआईटी चेन्नई रिसर्च कर रहा है कि सीमेंट में कौन सी वस्तु मिलाई जाए कि उसकी क्षमता 1 हजार वर्ष तक टिकाऊ हो जाएं। वैज्ञानिक ऐसा सब इसलिए कर रहे हैं ताकि मंदिर की मियाद 1 हजार वर्ष तक हो। वह बताते हैं ये सब कार्य पूर्ण होने के बाद मंदिर निर्माण शुरू होगा। उन्होंने कहा कि राममंदिर के नक्शा के लिए शुल्क जमा करने में कोई रियायत नहीं मांगी गई थी, मंदिर समाज के धन से बनेगा और शुल्क भी समाज के लिए उपयोग होगा।
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