सूत्रों के मुताबिक, मंदिर के कार्यों से गोपाल ने अपने एक रिश्तेदार को जोड़ रखा है। वह भी उनकी शह पर मंदिर के प्रत्येक कार्य में हस्तक्षेप करने लगा। वह भी गोपाल की आईडी से वीवीआईपी दर्शन की बुकिंग करता है। मतलब नाम गोपाल राव का और काम उसका रिश्तेदार करता है। वहीं सूत्रों ने यह भी बताया कि गोपाल को ये अधिकार ट्रस्ट ने दे रखे थे। जबकि ये अधिकार बेहद संवेदनशील है, क्योंकि जिनके पास पास बनते हैं, वे वीवीआईपी दर्शन मार्ग से मंदिर परिसर में जाते हैं। वहां से देश-विदेश के प्रमुख लोग भी गुजरते हैं।
इनके पास है पास बनाने का अधिकार
मंदिर में वीवीआईपी दर्शन के लिए कुछ लोगों को पास बनवाने का अधिकार दिया गया है। इसमें ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, अनिल मिश्रा, डीएम, एसएसपी, डीआईजी और एसपी सुरक्षा शामिल हैं, जिनके जरिए वीवीआईपी पास बनते हैं। अब गोपाल राव को यह अधिकार देना सवाल खड़ा करता है, जबकि यह उनकी जिम्मेदारी नहीं है।
सोशल मीडिया से लेकर आम लोगों में गोपाल राव व उनके रिश्तेदार को लेकर काफी चर्चा है, खासकर संपत्ति बढ़ने को लेकर। हालांकि इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं है। वहीं मंदिर निर्माण के वक्त गोपाल राव की बड़ी जिम्मेदारी रही है। निर्माण सामग्री, खासकर पत्थरों की खरीदारी कहां से होनी है, कौन-सा पत्थर आना है आदि मामलों में उनकी अहम भूमिका बताई जाती है। अब जो विवाद हुआ है, उससे तमाम सवाल उठने लगे हैं।
टिन्नू भी बनवाता था पास, वॉकी-टॉकी लेकर चलते थे सभी
पास बनवाने में टिन्नू की भी भूमिका रहती थी। सूत्र बताते हैं कि टिन्नू बिना पास के भी लोगों को अपने नाम से दर्शन करवाता था। टिन्नू से लेकर गोपाल राव के रिश्तेदार व दर्जनों ऐसे लोग, जो ट्रस्टियों के करीबी या रिश्तेदार हैं, वॉकी-टॉकी लेकर मंदिर परिसर में घूमते थे। एक तरह से वे पूरी व्यवस्थाओं में जुटे रहते थे, जो उनके अधिकार क्षेत्र के बाहर था।