नील सरोरुह नील मनि नील नीरधर स्याम। लाजहिं तनु सोभा निरखि कोटि-कोटि सत काम...। रामलला के स्वरूप को दर्शाती यह पंक्तियां रामलला के अचल विग्रह का दर्शन कर मूर्त रूप लेने लगती है। प्राण प्रतिष्ठा के दिन रामलला पूरे ठाठ-बाट से मंदिर में प्रतिष्ठित हुआ। रामलला ने जब पहली बार नए मंदिर में दर्शन दिया तो उनका भव्य श्रृंगार किया गया था। सोना, चांदी आदि रत्नों से उनका भव्य श्रृंगार किया गया था। श्यामल रामलला के मुख का दर्शन कर साधक व भक्त भावविभोर होते रहे।
मूर्ति में इतना खास है सबकुछ
-200 किलो की प्रतिमा को पांच किलो सोने के जेवरात पहनाए गए हैं।
-नख से ललाट तक भगवान जवाहरातों से सजे हुए हैं।
-रामलला ने सिर पर सोने का मुकुट पहन रखा है।
-मुकुट में माणिक्य, पन्ना और हीरे लगे हैं। बीच में सूर्य अंकित हैं।
-दायीं ओर मोतियाें की लड़िया हैं। कुंडल में मयूर आकृतियां बनी हैं।
-इसमें भी सोना, हीरा, माणिक्य और पन्ना लगा है। ललाट पर मंगल तिलक है।
-कमर में रत्न जडि़त करधनी है। इसमें छोटी-छोटी पांच करधनियां हैं।
-दोनों हाथों में रत्न जड़े कंगन हैं।
-बाएं हाथ में सोने का धनुष और दाहिने में सोने का बाण है।
-दाहिने हाथ के अंगूठे में एक अंगूठी है।
-रामलला के चरणों में सोने की माला से सजा कमल है।
-भगवान के सामने खेलने के लिए चांदी से बने खिलौने रखे हैं।