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राम मंदिर चढ़ावा चोरी: टिन्नू ने गबन करने के लिए मनीष को रखवाया, चंपत और गोपाल का कहीं जिक्र तक नहीं

Tue, 07 Jul 2026 05:49 AM IST
रोहित मिश्र अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ

सार

Ram Temple offerings stolen: राम मंदिर चढ़ावा चोरी के लिए बनी एसआईटी की रिपोर्ट आ गई है। इस रिपोर्ट में चंपत राय और गोपाल राव का कहीं जिक्र तक नहीं है। 
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राम मंदिर में चढ़ावा चोरी। - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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 राम मंदिर चढ़ावा चोरी की एसआईटी रिपोर्ट सोमवार को राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास की बैठक में रखी गई। रिपोर्ट के मुताबिक, रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू मंदिर परिसर में विभिन्न स्थानों पर रखी हुंडियों की चाबियां ट्रस्ट प्रतिनिधि के तौर पर अपने पास रखता था। हालांकि, इसका कोई औपचारिक अधिकार जारी नहीं किया गया था। उसी ने गबन करने के लिए भतीजे मनीष यादव को ट्रस्ट में नौकरी दिलाकर गणना में ड्यूटी लगवाई थी।

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रिपोर्ट में गणना प्रभारी सुभाष श्रीवास्तव की जिम्मेदारी भी तय की गई है, क्योंकि उसकी मौजूदगी में रकम पार की गई। इसलिए उस पर भी केस दर्ज किया गया है। एसआईटी रिपोर्ट के पहले बिंदु में बताया गया है कि आरोपी नोटों की गड्डियां पार करते थे। उपलब्ध सीसीटीवी फुटेज के मुताबिक 45 दिनों में वह 70 बार चोरी करते हुए कैद हुआ।

रिपोर्ट में बताया गया है कि 27 अप्रैल 2026 से लेकर 45 दिनों की ही फुटेज मिली हैं। इसलिए यह पता नहीं लग सका है कि उसके पहले कब-कब चोरी की गई। शायद अब यह पता भी नहीं चल पाएगा। एसआईटी ने यह भी स्पष्ट लिखा है कि फुटेज सीमित समय की मिलने के कारण चोरी की घटनाओं और वास्तविक गबन राशि का आकलन नहीं हो पाया है।

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एसआईटी रिपोर्ट के अन्य प्रमुख बिंदु

- अपराध इसलिए हुआ क्योंकि निर्धारित सुरक्षा उपायों का अनुपालन नहीं किया गया। प्रवेश, तलाशी, निर्धारित वेशभूषा, निजी वस्तुओं पर नियंत्रण, हुंडीवार गणना, मूल्यवर्गवार अभिलेखीकरण व प्रभावी पर्यवेक्षण जैसी व्यवस्थाएं लागू नहीं थीं।

- ट्रस्ट और बैंक से संबंधित पर्यवेक्षकों/प्रतिनिधियों की उपस्थिति के बावजूद निर्धारित सुरक्षा उपाय प्रभावी रूप से लागू नहीं किए गए।
- गणना कक्ष में सीसीटीवी कैमरों की व्यवस्था थी। यदि ट्रस्ट द्वारा नियुक्त कार्मिक गणना के समय सीसीटीवी फुटेज सतर्क होकर देखते, तो चोरी होती ही नहीं।

- नकदी गणना का काम काफी संवेदनशील है। इसके लिए मात्र 45 दिन की सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखना उचित नहीं था। 180 दिन की सीसीटीवी फुटेज संरक्षित रखने का सुझाव दिया गया था, जिसका अनुपालन नहीं किया गया।
- बैंक के अधिकारियों द्वारा गणना कार्मिकों को निर्धारित वेशभूषा उपलब्ध नहीं कराई गई। बैंक के प्रतिनिधि भी गणना कार्य के दौरान उपस्थित रहते थे।

- गणना प्रक्रिया में शामिल कार्मिकों की देखरेख की जिम्मेदारी बैंक की थी। बैंक अधिकारियों का मासिक अंतराल में रोटेशन भी प्रावधानित था लेकिन किसी भी नियम का पालन नहीं किया गया।

- यह प्रारंभिक जांच रिपोर्ट है। जांच अभी जारी है। पर्यवेक्षणीय विफलताएं, प्रशासनिक उत्तरदायित्व, संस्थागत खामियां और सुधारात्मक सुझाव के संबंध में विस्तृत आख्या अंतिम रिपोर्ट में शामिल की जाएगी।
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गणना निगरानी के नियम किए कमजोर, चंपत-गोपाल का जिक्र तक नहीं

 राम मंदिर चढ़ावा चोरी की एसआईटी रिपोर्ट सामने आ गई है। इसके मुताबिक, गणना प्रक्रिया की निगरानी के नियमों को ट्रस्ट पदाधिकारियों ने बदलकर कमजोर कर दिया। रिपोर्ट में अनिल मिश्रा की लापरवाही और चोरी में रामशंकर उर्फ टिन्नू यादव की मुख्य भूमिका बताई गई है। वहीं, रिपोर्ट में चंपत राय और गोपाल राव का कहीं भी जिक्र नहीं है।

मंदिर परिसर में सोमवार को हुई ट्रस्ट की बैठक में रखी गई एसआईटी रिपोर्ट के मुताबिक 6 फरवरी 2025 को गणना प्रक्रिया की निगरानी को लेकर एसओपी तैयार की गई थी। इसमें तय किया गया था कि गणना कक्ष में किस-किसकी आवाजाही रहेगी, गणनाकर्मियों की एंट्री कब होगी और वे कैसे कपड़े पहनेंगे। गणना प्रक्रिया के पहले और बाद में कर्मियों की तलाशी भी होगी। लेकिन निगरानी नियमों को शिथिल कर दिया गया और आरोपियों ने इसका फायदा उठाकर रकम पार की।

 रिपोर्ट में लिखा गया है, यह चिंता व जांच का विषय है कि पदाधिकारियों ने किन परिस्थितियों में ये बदलाव किए? रिपोर्ट में चंपत राय और गोपाल राव का जिक्र नहीं होने पर सवाल उठा रहा है कि क्या एसआईटी ने उनको क्लीन चिट दे दी है या विस्तृत जांच में उनकी भूमिका की जांच की जा रही है। वहीं, अनिल मिश्रा की भूमिका पर लिखा है कि उन्हें दान व चढ़ावा प्रबंधन की जिम्मेदारी 20 सितंबर 2024 को दी गई थी। उन्हें गणना प्रक्रिया की निगरानी कर प्रभावी पर्यवेक्षण करना था जो नहीं किया गया। इसलिए उनको दोषी पाया गया है।
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