निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्रमिश्र के साथ ट्रस्ट के महासचिव व राममंदिर मॉडल के प्रमुख शिल्पकार रहे चंपत राय भी दिल्ली से अयोध्या आएंगे। उनके साथ अनुभवी इंजीनियरों की टीम भी होगी। यह टीम कार्यशाला भी जाएगी, जहां विहिप के प्रस्तावित 128 फीट ऊंचा, 140 फीट चौड़ा और 268.5 फीट लंबे राममंदिर की तैयारी की समीक्षा होगी। यह मॉडल भगवान विष्णु के पसंदीदा अष्टकोणीय आकार में होगा। नागर शैली में पूर्णतया पत्थरों से बनने वाले दो मंजिला मंदिर में पांच प्रखंड होंगे। दो मंजिला मंदिर में करीब 1.75 लाख घन फुट पत्थर लगने हैं, जिसके सापेक्ष एक लाख पत्थर तराशने का विहिप दावा करती है। हालांकि, गर्भगृह का निर्माण अभी होना है जहां मूर्ति की पूजा की जाएगी। इसके अलावा मंदिर के नीचे पूरी सतह की नींव छह फीट आरसीसी से बनेगी, इसके बाद पूरी सतह पर बंशी पहाड़पुर के पत्थर की मोटी लेयर से होगी, जिस पर मंदिर निर्माण होगा।
बंशी पहाड़पुर के पत्थर की विशेषताएं
बंशी पहाड़पुर भरतपुर की रूपवास तहसील बयाना उपखंड क्षेत्र में स्थित है। जहां पर बंध बारैठा अभ्यारण्य स्थित है। वहीं पर यह पहाड़ है, जिसके चारों तरफ पानी भरा रहता है। इसका प्रयोग देश की अनेक ऐतिहासिक इमारतों के निर्माण के लिए किया गया है। जैसे-लाल किला, बुलंद दरवाजा, बीकानेर का जूनागढ़ आदि इमारतों के साथ ही देश के अनेकों किलों का निर्माण इसी पत्थर से हुआ था, जो हजारों वर्षों से ऐसे ही खड़े हैं। इस पत्थर की खास बात है कि इसका रंग कभी नहीं बदलता है। भरतपुर का यह पत्थर न केवल देश, बल्कि विदेश में भी ख्याति प्राप्त है, क्योंकि यह पत्थर पानी में होता है और अपने गुलाबी रंग के साथ सुंदरता के लिए प्रसिद्ध है।
तराशे गए पत्थरों की होगी केमिकल से सफाई
निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र के समक्ष तैयार शिलाओं को केमिकल से चमकाने का प्रदर्शन करने के लिए ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने पूरी तैयारी की है। इसके राजस्थान से कारीगर बुलाए गए हैं। पत्थर पर जमी काई केमिकल डालते ही साफ हो जाएगी, इसके बाद दो कोट केमिकल से करने के बाद जब धुलाई होगी तो पत्थर चमक उठेंगे। इन कारीगरों को 29 फरवरी को बुलाया है।
पिंडवाड़ा व अजमेर से आएंगे तैयार दरवाजे, कंगूरे जाली
सिरोही जिले के पिंडवाड़ा में विहिप की तीन कार्यशालाएं सालों से बंद हैं, लेकिन वहां काफी मात्रा में तराशे गए पत्थर आज भी हैं। मातेश्वरी मार्बल, शिवशक्ति मॉर्बल और सोमपुरा मॉर्बल कंपनियों को पत्थर तराशकर अयोध्या भेजने का काम फिर सौंपा जा रहा है। राम मंदिर के लिए जिस साइज का खंभा पिलर या कंगूरे बनने हैं उसी साइज का ब्लॉक यहां से काटकर तराशा गया है। राममंदिर के पहले तल पर जो दरवाजे, जाली व फर्श होगी, वह राजस्थान के अजमेर जिले के सफेद मकराना पत्थर से तैयार होगी।