फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

राम मंदिर: दान चोरी विवाद के बीच सीएम योगी का अयोध्या दौरा कल, दूर रखे जाएंगे चंपत राय; इसलिए भूमिका हुई सीमित

Fri, 19 Jun 2026 07:23 AM IST
रोहित मिश्र अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ

सार

Ram Mandir donation theft issue: राम मंदिर दान चोरी विवाद के बाद पहली बार सीएम योगी अयोध्या दौरे पर होंगे। उनके इस दौरे में चंपत राय को दूर रखा जाएगा। 
विज्ञापन
राम मंदिर दान चोरी का मामला। - फोटो : अमर उजाला।
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

 मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के शुक्रवार को प्रस्तावित अयोध्या दौरे से पहले राम मंदिर से जुड़ी व्यवस्थाओं को लेकर जारी एक प्रशासनिक निर्देश चर्चा का विषय बन गया है। जिला प्रशासन की ओर से जारी सुरक्षा एवं प्रोटोकॉल कार्यक्रम में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय से मुख्यमंत्री के दर्शन-पूजन कार्यक्रम की व्यवस्थाओं के लिए एक अधिकृत प्रतिनिधि नामित करने का अनुरोध किया गया है।

विज्ञापन


मुख्यमंत्री का रामलला के दर्शन-पूजन का कार्यक्रम तय है। इसके लिए ट्रस्ट की ओर से किसी प्रतिनिधि का नाम और संपर्क विवरण ड्यूटी मजिस्ट्रेट को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि पूजन और प्रोटोकॉल संबंधी तैयारियों का समन्वय समय से पूरा किया जा सके। प्रशासनिक स्तर पर इसे सामान्य व्यवस्था बताया जा रहा है, लेकिन राम मंदिर दान राशि गड़बड़ी प्रकरण की एसआईटी जांच के बीच इस निर्देश ने कई तरह की चर्चाओं को जन्म दे दिया है। सूत्रों के अनुसार, हाल के दिनों में सामने आए घटनाक्रमों के बाद शासन और प्रशासन राम मंदिर से जुड़े प्रत्येक पहलू को अत्यंत सतर्कता के साथ देख रहे हैं। ऐसे में मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में महासचिव की प्रत्यक्ष भूमिका न होने को लेकर राजनीतिक और सामाजिक हलकों में अलग-अलग अर्थ निकाले जा रहे हैं।

विज्ञापन

दूरी से एक संकेत देने की कोशिश

राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय - फोटो : amar ujala
यदि मुख्यमंत्री के राम मंदिर प्रवास के दौरान चंपत राय सार्वजनिक रूप से प्रमुख भूमिका में दिखाई नहीं देते हैं, तो इसे जांच प्रक्रिया के बीच एक महत्वपूर्ण संदेश के रूप में देखा जाएगा। इससे यह संकेत जा सकता है कि सरकार दानराशि गड़बड़ी प्रकरण की जांच को पूरी गंभीरता से ले रही है और जांच पूरी होने तक किसी भी व्यक्ति के पक्ष या विपक्ष में खड़े होने की बजाय संस्थागत प्रक्रिया को प्राथमिकता दे रही है। यह संदेश भी जा सकता है कि सरकार मंदिर की आस्था और विवादों को अलग-अलग रखकर देखना चाहती है। एक ओर मुख्यमंत्री रामलला के दर्शन कर श्रद्धालुओं और संत समाज से जुड़ाव का संदेश देंगे, वहीं दूसरी ओर विवादों के केंद्र में रहे व्यक्तियों से औपचारिक दूरी बनाए रखकर पारदर्शिता और जवाबदेही पर जोर देते दिखाई देंगे।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें