सूत्रों के अनुसार तकनीकी जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रवेशद्वार 10 मीटर आगे बढ़ाकर बनाना चाहिए था, इससे इसकी चौड़ाई कई गुना बढ़ जाती। इसे मानक के अनुसार नहीं बनाया गया है। इस रिपोर्ट पर अब शासन गंभीर है। यहां आए दिन हादसे होते रहते हैं और गेट संकरा होने की वजह से श्रद्धालु अक्सर जाम से जूझते हैं। नोडल अधिकारी व क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी बीपी सिंह ने बताया कि, फिलहाल राम प्रवेशद्वार का निर्माण कार्य ठप है। इस बारे में उनके पास कोई जानकारी नहीं है।
भव्य रूप से अन्यत्र होगा निर्माण
नगर विधायक वेदप्रकाश गुप्ता का कहना है कि, ये प्रवेशद्वार अयोध्या के लिहाज से बिल्कुल भी उचित नहीं है। प्रवेशद्वार के निर्माण में शासकीय धन का दुरुपयोग किया गया है। ये द्वार रामनगरी में दाखिल होने वाले श्रद्धालुओं के सैलाब के मुकाबले काफी संकरा है। मेलों के दौरान ये समस्या खुलकर सामने आती है। फिलहाल इस प्रवेशद्वार के ध्वस्तीकरण का निर्णय लिया गया है। नगर विधायक ने कहा कि, राम प्रवेशद्वार किसी अन्य स्थान पर भव्य रूप में बनाया जाएगा। इसके लिए जगह देखी जा रही है।
मामले पर फैजाबाद के डीएम डॉ. अनिल कुमार पाठक का कहना है कि नया घाट तिराहे पर अधूरे पड़े राम प्रवेशद्वार का मामला संज्ञान में है। इसके ध्वस्तीकरण से पहले व्यय हुए धन की जिम्मेदारी तय करनी जरूरी है, वरना ऑडिट रिपोर्ट में इसका जवाब कैसे दिया जाएगा। पूर्ववर्ती डीएम-एसएसपी की रिपोर्ट व शासन से आई तकनीकी टीम की रिपोर्ट का संज्ञान लेकर कार्रवाई की तैयारी जा रही है। इसके बाद शासन का आदेश मिलते ही उसका पालन कराया जाएगा।