राज्यपाल राम नाईक ने कहा कि हम विकास की कितनी भी बातें करें, लेकिन मथुरा के जवाहर बाग कांड के बारे में सोचने पर महसूस होता है कि आखिर क्या हो रहा है सरकार की नजरों के सामने?
न्यायालय के आदेश के बाद पुलिस अपना काम करने जाए और उसकी ही हत्या हो जाए तो यह चिंता का विषय है। वहां जिस तरह अतिक्रमण हुआ, उससे लोग यह सोचकर चिंतित हैं कि कल उनकी जमीन पर भी अतिक्रमण हो सकता है।
राज्यपाल बुधवार को गोमतीनगर में ‘उत्तर प्रदेश में विकास और राजनीति’ विषयक संगोष्ठी में बोल रहे थे। उन्होंने विधानसभा चुनाव की चर्चा करते हुए कहा कि मतदान में कई बातें महत्व रखती हैं। लोग केवल विकास के बारे में ही नहीं सोचते।
वे महंगाई, कानून-व्यवस्था, भ्रष्टाचार के मुद्दों पर भी सोचते हैं। वे हर तरह से उम्मीदवार को परखते हैं। देखते हैं कि आज जो प्रतिनिधि है, पांच साल पहले वह कैसे कपड़े पहनता था, उसके पास कैसी गाड़ी थी, आज कैसी गाड़ी है। लोग बहुत कुछ देखते हैं, फिर फैसला करते हैं। भारत की राजनीति में कई बार ऐसे अवसर आए।
'फीलगुड वाली सरकार के खिलाफ दिया मतदान'
राज्यपाल ने कहा, जिस वाजपेयी सरकार में मैं भी मंत्री था, उसके बारे में फीलगुड-फीलगुड की बात होती रही, लेकिन लोगों ने उस सरकार के खिलाफ मतदान किया। वरिष्ठ पत्रकार राहुल देव और अंबिका नंद सहाय ने भी विचार व्यक्त किए।
शत-प्रतिशत मतदान हो
राज्यपाल ने कहा कि मतदान प्रतिशत जरूर बढ़ता जा रहा है लेकिन शत-प्रतिशत मतदान की जागरूकता लाने की जरूरत है। यदि 50 प्रतिशत मतदान होता है और चार पार्टियां मैदान में हैं तो 13-14 या 15 प्रतिशत मत पाने वाला राजनीतिक दल या उम्मीदवार विजयी हो जाता है और पूरी जनता का प्रतिनिधि बन जाता है।
तिलक, विद्यार्थी और पराड़कर
राज्यपाल ने कहा कि बाल गंगाधर तिलक, गणेश शंकर विद्यार्थी और बाबूराव विष्णु पराड़कर जैसे पत्रकारों ने स्वतंत्रता आंदोलन में महत्वपूर्ण योगदान किया। उन्होंने समाचार पत्रों के संपादकीय की चर्चा करते हुए कहा कि पाठक भी पहले संपादकीय पढ़ते थे, लेकिन अब यह कम हो गया है।