राज्यपाल राम नाईक ने कहा कि किसी भी अन्य भाषा का विरोध किए बिना हमें विश्व में हिंदी को प्रसारित व स्थापित करना होगा।
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हम सब मिलकर प्रयास करें तो विश्व में हिंदी को श्रेष्ठता के साथ ही संयुक्त राष्ट्र संघ की भाषा का दर्जा मिल सकता है।
यह बात उन्होंने अखिल भारतीय मंचीय कवि पीठ उत्तर प्रदेश के तत्वावधान में शनिवार से शुरू हुए दो दिवसीय अन्तरराष्ट्रीय हिंदी कविता समारोह के पहले दिन विश्वेश्वरैया प्रेक्षागृह में कही। समारोह की अध्यक्षता करते हुए राज्यपाल ने देश व विदेश के साहित्यकारों व हिंदी सेवियों को सम्मानित किया।
राज्यपाल ने कहा कि हिंदुस्तान में जब दो प्रदेशों के लोग मिलते हैं तो वे अक्सर अंग्रेजी में बात करना पसंद करते हैं लेकिन विदेशों में चेहरा देखकर ही लोग एक-दूसरे को हिंदुस्तानी जानकर हिंदी में बात करते हैं।
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आयोजन की तारीफ करते हुए राज्यपाल ने कहा कि देश और विदेश में रह रहे हिंदी सेवियों को एक जगह बुलाकर ऐसे समारोह का आयोजन करना बड़ी बात है।
‘मेरी प्रार्थना को आप आदेश मान सकते हैं’
दस वर्ष पूरे होने पर अंतरराष्ट्रीय हिंदी कविता समारोह के आयोजन को अगले वर्ष बड़े स्तर पर कराने को लेकर पहले तो राज्यपाल ने मंत्री शिवपाल सिंह की ओर मुखातिब होते हुए कहा कि मैं प्रार्थना करता हूं कि इस आयोजन को वृहद स्तर पर कराया जाए।
लेकिन अगले ही पल वे बोले कि मैं राज्यपाल हूं और इसलिए आप इसे आदेश मान सकते हैं। यह कहते ही समारोह स्थल पर ठहाके गूंज उठे। कहा कि लखनऊ का जो सबसे बड़ा हाल हो वहां यह आयोजन कराया जाए।
राज्यपाल राम नाईक वक्ताओं के बारबार उन्हें महामहिम कहने पर खफा हो गए। बोले कि हम कब तक अंग्रेजी शासन के बोझ तले दबे रहेंगे। उन्होंने बताया कि मैंने जिस दिन शपथ ली थी उसी दिन महामहिम शब्द पर आपत्ति जताई थी।
सिनेमा को सराहा, टेलीविजन को कोसा
उन्होंने हिंदी के प्रसार में सिनेमा के योगदान को सराहा तो वहीं टेलीविजन पर हिंदी को खराब करने का भी आरोप लगाया। इस अवसर पर उप्र. हिंदी संस्थान के कार्यकारी अध्यक्ष उदय प्रताप सिंह को सरस्वती शिखर अलंकरण से सम्मानित किया गया।
उन्होंने अपनी रचना ‘एक जन्मदाता है विधाता एक सृष्टि का...’ सुनाकर अपनी बात रखी। मुख्य अतिथि प्रदेश के लोक निर्माण मंत्री शिवपाल सिंह यादव ने कहा कि हिंदी को संयुक्त राष्ट्र संघ की आधिकारिक भाषा का दर्जा मिलना चाहिए जिसके लिए सभी को मिलकर प्रयास करने होंगे।
कार्यक्रम का संचालन समारोह के सह संयोजक डॉ. कमलेश द्विवेदी ने किया। देर शाम यहां कवि सम्मेलन का भी आयोजन किया गया जिसमें, देश-विदेश से आए साहित्यकारों ने देर रात तक काव्य पाठ किया।
सरस्वती शिखर अलंकरण उदय प्रताप सिंह उपलब्धि सम्मान- 2014 : प्रो. सरन घई (समारोह में नहीं पहुंचे)
उपलब्धि सम्मान- 2013 : डॉ. जय वर्मा (नाटिंघम) हिंदी पत्रकारिता सम्मान : दीपक द्विवेदी (नई दिल्ली) विश्व हिंदी सेवा सम्मान से नवाजे गए हिंदी सेवी डॉ. हेमराज सुंदर (मॉरीशस), डॉ. बुद्धिनाथ मिश्र (देहरादून)
डॉ. जय वर्मा (नाटिंघम), डॉ गंगा प्रसाद शर्मा (चीन), डॉ. देवी नागरानी (न्यू जर्सी), इं. सतीश चंद्र मिश्र (न्यूयार्क), डॉ. वेद प्रकाश ‘वटुक’ (कैलीफोर्निया), महावीर प्रसाद नेवटिया (मुम्बई), चंद्रशेखर शुक्ला (मुम्बई)
डॉ. मंजू मिश्रा (कैलीफोर्निया), डॉ. सुदर्शन प्रियदर्शिनी (ओहायो), डॉ. शकुंतला बहादुर (सेन फ्रांसिस्को), डॉ. सुरेश चंद्र शुक्ल (नार्वे) (अनुपस्थित), डॉ. मृदुल कीर्ति (अटलांटा) (अनुपस्थित), डॉ. यास्मीन सुल्ताना नकवी (जापान) (अनुपस्थित)
शारदा सम्मान से नवाजे गए हिंदी सेवी अजय शेखर (सोनभद्र), दिनेश मिश्र बैसवारी (मुंबई), डॉ. प्रेम सुमन शर्मा(लखनऊ), अशोक पांडेय (लखनऊ), श्रीकांत तिवारी ‘कांत’(लखीमपुर), श्याम नारायण स्वामी(इलाहाबाद)