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राम मंदिर: SIT आज सौंप सकती है अंतिम जांच रिपोर्ट, पहली रिपोर्ट में 40 दिन में 70 बार चोरी का हो चुका खुलासा

Wed, 15 Jul 2026 01:08 PM IST
Akash Dwivedi डिजिटल डेस्क, लखनऊ

सार

राम मंदिर चढ़ावा चोरी प्रकरण में विशेष जांच दल की अंतिम रिपोर्ट शासन को सौंपी जा सकती है। जांच में दान प्रबंधन, सुरक्षा व्यवस्था, खरीद प्रक्रिया और नियुक्तियों में कई गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। चोरी की घटनाओं के संबंध में सीसीटीवी साक्ष्य और अन्य दस्तावेजों के आधार पर आगे की कार्रवाई की तैयारी है।
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राम मंदिर - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार
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अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावा चोरी प्रकरण की अंतिम जांच रिपोर्ट बुधवार को शासन को सौंपी जा सकती है। सूत्रों के अनुसार, लखनऊ मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत के नेतृत्व में गठित तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (एसआईटी) ने अपनी रिपोर्ट लगभग तैयार कर ली है। बताया जा रहा है कि अंतिम रिपोर्ट में चढ़ावा चोरी के मामले में कुछ और लोगों की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं।

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राज्य सरकार ने 13 जून को इस मामले की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया था और 15 जून से जांच शुरू हुई थी। सरकार ने एसआईटी को 15 जुलाई तक अंतिम रिपोर्ट सौंपने का समय दिया था। प्रारंभिक जांच में 40 दिनों के दौरान 70 बार चढ़ावा चोरी, दान राशि की गणना में अनियमितता तथा बैंक कर्मियों की कथित मिलीभगत जैसे गंभीर तथ्य सामने आए थे।

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एसआईटी ने जांच में यह भी पाया था कि चढ़ावे की गणना के लिए तैनात कर्मचारियों को पर्याप्त जांच के बिना प्रवेश दिया जाता था। प्रारंभिक रिपोर्ट में ट्रस्ट के तत्कालीन सदस्य डॉ. अनिल मिश्रा और गणना प्रभारी सुभाष श्रीवास्तव की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए थे। अब अंतिम रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई पर शासन का फैसला अहम माना जा रहा है।

 

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राम मंदिर चढ़ावा चोरी। - फोटो : अमर उजाला।

23 जून को सौंपी थी पहली रिपोर्ट

राम मंदिर की व्यवस्थाओं और दानराशि प्रबंधन की जांच कर रही एसआईटी ने 23 जून को अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट शासन को सौंपी थी। सूत्रों के अनुसार, एसआईटी जांच में राम मंदिर की व्यवस्थाओं से जुड़ी पांच बड़ी खामियां मिली हैं। 
जांच के दौरान मंदिर की प्रशासनिक, वित्तीय और संचालन व्यवस्था से जुड़ी कई गंभीर खामियां सामने आई हैं। रिपोर्ट में दानराशि की सुरक्षा से लेकर नियुक्तियों, खरीद प्रक्रिया और प्रसाद वितरण व्यवस्था तक कई बिंदुओं पर सवाल उठाए गए हैं।

जांच में पाया गया कि श्रद्धालुओं के चढ़ावे को मंदिर परिसर से बैंक तक पहुंचाने तथा गणना कक्ष में उसकी गिनती की प्रक्रिया में पर्याप्त सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था नहीं थी। यही कारण है कि दानराशि प्रबंधन को लेकर कई स्तरों पर सुधार की आवश्यकता महसूस की गई।

व्यवस्था मानक के अनुरूप नहीं मिली

एसआईटी ने यह भी पाया था कि श्रद्धालुओं की ओर से भेंट किए गए सोने और चांदी के आभूषणों का समुचित अभिलेखीकरण नहीं किया जा रहा था। ऐसे कई मामलों का उल्लेख किया गया है, जहां मूल्यवान धातुओं के संग्रहण और रिकॉर्ड रखने की व्यवस्था मानक के अनुरूप नहीं मिली।

रिपोर्ट में मंदिर की विभिन्न नियुक्तियों पर भी सवाल उठाए गए हैं। जांच में सामने आया कि कई पदों पर नियुक्तियां निर्धारित प्रक्रिया और योग्यता मानकों के बजाय सिफारिशों के आधार पर की गईं। इससे प्रशासनिक दक्षता और जवाबदेही प्रभावित होने की बात कही गई है। 

इस आधार पर कार्रवाई तय

सूत्रों के अनुसार, एसआईटी ने इन सभी बिंदुओं पर सुधारात्मक कदम उठाने, जवाबदेही तय करने और वित्तीय व्यवस्थाओं को अधिक पारदर्शी बनाने की सिफारिश की है। शासन स्तर पर रिपोर्ट का अध्ययन किया जा रहा है और इसके आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।

प्रसाद वितरण में भी मिली खामियां

सामग्री खरीद की प्रक्रिया को लेकर भी एसआईटी ने आपत्तियां दर्ज की हैं। रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि कई मामलों में टेंडर प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी नहीं थी। कुछ खरीद मामलों में कमीशनखोरी और निर्धारित प्रक्रिया के पालन न होने के संकेत भी मिले हैं। 

इसके अलावा प्रसाद वितरण और सीता रसोई के संचालन में भी कई खामियां सामने आई हैं। जांच में पाया गया कि खाद्य सामग्री और अन्य सामानों की खरीद कई बार बाजार दर से काफी अधिक कीमत पर की गई। इससे वित्तीय अनुशासन और निगरानी व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न खड़े हुए हैं।

 

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राम मंदिर चढ़ावा चोरी। - फोटो : अमर उजाला।

40 दिन में 70 बार चोरी हुई

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में एक नया खुलासा हुआ है। गिरोह ने अविनाश शुक्ला को चोरी की मुख्य जिम्मेदारी दी थी। वह सबसे अधिक बार चोरी करते हुए कैमरे में कैद हुआ। बाकी सदस्य उसे कवर करके खड़े रहते थे। मनीष और रमाशंकर ने भी कई बार रकम पार की। एसआईटी जांच में यह बात सामने आई थी। अब पुलिस की विवेचना में भी इसकी पुष्टि हुई है। एसआईटी की विस्तृत जांच अंतिम चरण में है, जबकि पुलिस की विवेचना लंबी चलेगी।

एसआईटी जांच में पता चला कि 40 दिन में 70 बार चोरी की गई थी। सीसीटीवी फुटेज से यह स्पष्ट हुआ है। अविनाश शुक्ला लगभग 50 बार रकम पार करते दिखाई दिया। पुलिस ने भी सीसीटीवी फुटेज को साक्ष्य के तौर पर शामिल किया है। फुटेज रिपोर्ट से पुष्टि हुई कि अविनाश ही अधिकांश रकम पार करता था। रिमांड पर पूछताछ में अविनाश ने बताया कि उसे ही अक्सर रकम पार करने की जिम्मेदारी दी जाती थी। वह शातिर होने के कारण आसानी से रकम लेकर निकल जाता था।

पूरा खेल अनुकल्प-लवकुश रचते थे

टिन्नू यादव और गणनाकर्मी सुभाष श्रीवास्तव पर चोरी की निगरानी का काम था। उनका काम यह सुनिश्चित करना था कि किसी की नजर चोरों पर न पड़े। रकम कब और कैसे पार करनी है, यह अनुकल्प मिश्रा और लवकुश मिश्रा तय करते थे। उसके बाद अविनाश, मनीष और रमाशंकर रुपये पार करते थे। 

एसआईटी जांच में अनुकल्प की मुख्य भूमिका सामने आई थी। पुलिस की विवेचना में भी ऐसे ही साक्ष्य मिल रहे हैं। सीसीटीवी फुटेज से स्पष्ट है कि आरोपियों ने लगभग हर दिन दो बार रकम पार की। अविनाश, अनुकल्प और लवकुश ने रिमांड पर बताया कि वे अक्सर दो बार ही रकम पार करते थे। कभी-कभी वे तीन बार भी हाथ साफ करते थे। यह खेल तब से चल रहा था जब से ये सभी काम पर लगाए गए थे।
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