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राम मंदिर गबन: चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव को एसआईटी ने नहीं दी क्लीन चिट, अभी तीनों जांच के घेरे में

Sun, 28 Jun 2026 04:03 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ

सार

एसआईटी की विस्तृत जांच में इन सभी की भूमिका की जांच जारी है। प्राथमिक रिपोर्ट में इसका जिक्र भी है। विस्तृत जांच रिपोर्ट में इन पदाधिकारियों के बारे में स्पष्ट किया जाएगा कि इनकी भूमिका है या नहीं, या फिर ये लापरवाही के दोषी हैं।
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चंपत राय और अनिल मिश्रा - फोटो : PTI
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विस्तार
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राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और अनिल मिश्रा के अलावा निर्माण समिति के सहायक गोपाल राव को एसआईटी ने क्लीन चिट नहीं दी है। एसआईटी की विस्तृत जांच में इन सभी की भूमिका की जांच जारी है। प्राथमिक रिपोर्ट में इसका जिक्र भी है। विस्तृत जांच रिपोर्ट में इन पदाधिकारियों के बारे में स्पष्ट किया जाएगा कि इनकी भूमिका है या नहीं, या फिर ये लापरवाही के दोषी हैं।

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बड़े पैमाने पर बदलाव होगा
मंदिर के भीतर हुई चोरी ने देशभर में सनसनी फैला दी है। संवेदनशील स्थान पर इतनी बड़ी घटना का होना सुरक्षा में बड़ी चूक है। सूत्रों के मुताबिक, एसआईटी ने प्रारंभिक रिपोर्ट में सुरक्षा की खामियों का जिक्र किया है। साथ ही अहम बदलाव की सिफारिश की है। सुरक्षा में लगे अधिकारियों से लेकर तमाम कर्मचारी बदले जाएंगे और निगरानी तंत्र को मजबूत करने के लिए कई और कदम उठाए जाएंगे। इसके लिए एसओपी तैयार की जा रही है।

गोपाल का न इस्तीफा, न कार्रवाई
मंदिर प्रबंधन से जुड़ा प्रत्येक कार्य चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव देखते थे। मंदिर निर्माण, दान राशि जैसे अहम कार्य में पूरा दखल इन्हीं का रहता था। इनकी नाक के नीचे इतना बड़ा हेरफेर हुआ और करोड़ों रुपये पार हो गए, इन्हें भनक तक नहीं, यह यकीन करना मुश्किल है। इसलिए तीनों सबसे अधिक सवालों से घिरे  हैं। अब तक गोपाल ने खुद इस्तीफा नहीं दिया, न ही कोई कार्रवाई की गई है। 
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चांदी की ईंटें व आभूषण सुरक्षित, हिसाब भी मौजूद
एक सिंधी संगठन ने चांदी की दो सौ ईंटें, विश्वकर्मा परिवार ने चरण पादुका व हार दान करने की बात कहते हुए बताया था कि उनको रसीद नहीं दी गई। अंदेशा जताया था कि ये सभी चीजें गायब कर दी गईं। कई और मामले भी सामने आए थे। इस पर भी ट्रस्ट ने दावा किया है कि चांदी की ईंटें व अन्य आभूषण हिसाब के साथ सुरक्षित हैं।

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