राम मंदिर की दान की रकम में हेरफेर कर गबन करने के मामले में एसआईटी की छानबीन चौथे दिन भी जारी रही। ट्रस्ट के प्रमुख पदाधिकारी चढ़ावे के जेवरातों का हिसाब-किताब सही से नहीं दे पा रहे हैं। अब आशंका बढ़ गई है कि करोड़ों की नकदी तो पार हुई ही है सोने, चांदी, हीरे के दान किए गए कीमती जेवरातों में भी हेरफेर किया गया। एसआईटी सुबह दस बजे से देर रात तक पूछताछ कर साक्ष्य जुटाने में लगी रही।
नजूल भूमि 24 करोड़ रुपये में खरीदने के दावे की भी पड़ताल
टिन्नू यादव से दोबारा पूछताछ, अनिल मिश्रा पर भी कसेगा शिकंजा
चंपत राय के ड्राइवर व सबसे अधिक सवालों के घेरे में रहने वाले टिन्नू यादव से एसआईटी ने बृहस्पतिवार को दोबारा पूछताछ की। गिनती करने वाले लोगों में उसके खास कर्मचारी कौन लोग थे? उसकी मौजूदगी वहां क्यों रहती थी? वह गोलमाल जवाब देता रहा। वहीं उसने गिनती प्रक्रिया में अनिल मिश्रा और गोपाल राव का नाम बताया है, इसलिए एसआईटी इन दोनों पर शिकंजा कस सकती है। खासकर अनिल मिश्रा पर। वह शुरू से मामले से बचते रहे हैं।
राम मंदिर ट्रस्ट में कोई पद नहीं....फिर भी गोपाल राव के पास है पास बनाने का अधिकार
राम मंदिर के निर्माण सहायक गोपाल राव का ट्रस्ट में कोई पद नहीं है, मगर उनकी शक्तियां अपार हैं। वह भी महासचिव चंपत राय की तरह अपने नाम से वीवीआईपी पास जारी करते हैं। यही नहीं, मंदिर संबंधी हर कार्य में उनकी अहम भूमिका रहती थी। एक तरह से मंदिर में होने वाली हर गतिविधि की जानकारी, मैनेजमेंट आदि उनके पास रहता था। इसमें उनका एक रिश्तेदार भी शामिल है।
वह भी उनकी शक्तियों का इस्तेमाल कर खुद को किसी अधिकारी से कम नहीं समझता था। ये सभी सवालों के घेरे में हैं। कर्नाटक निवासी गोपाल राव मंदिर में निर्माण सहायक हैं। जब से दान राशि की चोरी का मामला उजागर हुआ है, तब से वह सामने नहीं आए हैं। उनको लेकर तमाम चर्चाएं हैं। सूत्रों के मुताबिक, भले ही गोपाल का ट्रस्ट में कोई पद नहीं है, लेकिन वह दान राशि की गणना की प्रक्रिया से लेकर मंदिर प्रबंधन तक के मामलों में सीधे तौर पर शामिल रहते हैं।
रिश्तेदार भी करने लगा खेल
मंदिर के कार्यों से गोपाल ने अपने एक रिश्तेदार को जोड़ रखा है। वह भी उनकी शह पर मंदिर के प्रत्येक कार्य में हस्तक्षेप करने लगा। वह भी गोपाल की आईडी से वीवीआईपी दर्शन की बुकिंग करता है। मतलब नाम गोपाल राव का और काम उसका रिश्तेदार करता है। वहीं सूत्रों ने यह भी बताया कि गोपाल को ये अधिकार ट्रस्ट ने दे रखे थे। जबकि ये अधिकार बेहद संवेदनशील है, क्योंकि जिनके पास पास बनते हैं, वे वीवीआईपी दर्शन मार्ग से मंदिर परिसर में जाते हैं। वहां से देश-विदेश के प्रमुख लोग भी गुजरते हैं।
निर्माण के वक्त थी बड़ी जिम्मेदारी
मंदिर निर्माण के वक्त गोपाल राव की बड़ी जिम्मेदारी रही है। निर्माण सामग्री, खासकर पत्थरों की खरीदारी कहां से होनी है, कौन-सा पत्थर आना है आदि मामलों में उनकी अहम भूमिका बताई जाती है। अब जो विवाद हुआ है, उससे तमाम सवाल उठने लगे हैं।