ग्रामीणों के मुताबिक लवकुश मिश्रा पहले निजी कार्य करता था और करीब एक वर्ष पूर्व उसे राम मंदिर परिसर में नौकरी मिली थी। गांव के लोगों का कहना है कि नौकरी मिलने के बाद उसकी आर्थिक स्थिति में तेजी से बदलाव दिखाई देने लगा था। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। गांव में यह चर्चा भी है कि जांच के दौरान कुछ धनराशि अन्य स्थानों से भी बरामद की गई है। हालांकि इस संबंध में पुलिस अथवा ट्रस्ट की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में श्रद्धालुओं की ओर से अर्पित दानराशि में गबन एवं वित्तीय अनियमितताओं के मामले में सामाजिक कार्यकर्ता विक्रम तिवारी ने कोतवाली अयोध्या और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को शिकायती प्रार्थना पत्र देकर एफआईआर दर्ज कराने व निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।
शिकायत में कहा गया है कि समाचार पत्रों में प्रकाशित खबरों के अनुसार मंदिर की दानराशि के प्रबंधन में अनियमितताओं और नकदी बरामदगी की जांच चल रही है व कुछ कर्मचारियों की संलिप्तता की आशंका भी जताई गई है। उन्होंने कहा कि श्रीराम मंदिर करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है, ऐसे में दानराशि के दुरुपयोग अथवा गबन की आशंका अत्यंत गंभीर विषय है।
विक्रम ने एफआईआर दर्ज कर प्रकरण की जांच सीबीआई, ईडी, ईओडब्ल्यू व अन्य सक्षम एजेंसी से कराने की मांग की है। साथ ही दानराशि के संग्रहण, गणना, परिवहन और बैंक में जमा करने की प्रक्रिया का विशेष ऑडिट कराने, सीसीटीवी फुटेज व डिजिटल रिकॉर्ड सुरक्षित रखने तथा दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने की भी मांग उठाई है।